राजकुमार गौतम/बस्ती (यूपी)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज वनरक्षक अमरनाथ ने ग्राम प्रधान व पंचायत सेक्रेटरीयो को बिरऊपुर पौधशाला रेंज रामनगर पर प्रशिक्षण दिया। आगामी जुलाई महीने में यूपी सरकार की मंशा 22 करोड़ वृक्षारोपण की है जिसके लिए अभी से ही तैयारियां शुरू हो गई हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वनरक्षक अमरनाथ से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि शहरों का विकास होना, हरियाली कम और कांक्रीट के जंगलो की बढोतरी दर्ज की जा रही है। हर साल प्रदूषण के मामले में बढ़ोतरी हो रही है। नवंबर-दिसंबर माह में प्रदूषण की वजह से मौत के आंकड़े भी बढ़ जाते हैं। यदि हम अभी से नहीं चेते तो आने वाले कुछ सालों में साफ हवा में सांस लेने के लिए सिर्फ पहाड़ और जंगल ही बचे रह जाएंगे। प्रदूषण लगातार हमारी सांसें कम कर रहा है। नए पैदा होने वाले कई बच्चों पर इसका असर भी दिख रहा है। आज विश्व पर्यावरण दिवस है, ऐसे मौके पर हम सभी को कोई ऐसा प्रण लेना चाहिए जो आने वाली पीढ़ियों को साफ सुथरी हवा देने में मददगार हो सके। विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की गई थी। इसे 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था। 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। वनरक्षक अमरनाथ सिंह से किए गए प्रश्नों में उन्होंने बताया कि आम लोग भी अपनी सहभागिता पर्यावरण को सुरक्षित करने में निभा सकते हैं जिनके निम्नवत तरीके हैं
पर्यावरण को सुरक्षित रखने में आम लोगों का योगदान:
आम लोगों को भी इसमें योगदान देना है, इसके लिए वो अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें। सड़क पर कूड़ा ना फेंके और न ही कूड़े में आग लगाएं। कूड़ा रीसाइकल के लिए भेजें। प्लास्टिक, पेपर, ई-कचरे के लिए बने अलग-अलग कूड़ेदान में कूड़ा डाले ताकि वह आसानी से रीसाइकल के लिए जा सके।वाहन चालक निजी वाहन की बजाय कार-पूलिंग, गाडियों, बस या ट्रेन का उपयोग करें। कम दूरी के लिए साइकिल चलाना पर्यावरण और सेहत के लिहाज से बेहतर है।
पानी बचाने के लिए घर में लो-फ्लशिंग सिस्टम लगवाएं, जिससे शौचालय में पानी कम खर्च हो। शॉवर से नहाने की बजाय बाल्टी से नहाएं। ब्रश करते समय पानी का नल बंद रखो। हाथ धोने में भी पानी धीरे चलाएं। गमलों में लगे पौधों को बॉल्टी-मग्गे से पानी दें। नल में कोई भी लीकेज हो तो उसे प्लंबर से तुरंत ठीक करवाएं ताकि पानी टपकने से बरबाद न हो। नदी, तालाब जैसे जल स्त्रोतों के पास कूड़ा ना डालें। यह कूड़ा नदी में जाकर पानी को गंदा करता है। घर की छत पर या बाहर आंगन में टब रखकर बारिश का पानी जमा करें, इसे फिल्टर करके फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं।

