नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि प्रतिष्ठित पेशे को बदनाम करने पर चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) पेशेवर को सीए एक्ट, 1949 के तहत दंडित किया जा सकता है। यह सजा उसे सीए के रोल से हटाने की कार्रवाई भी हो सकती है। सीए गुरविंदर सिंह पर एक व्यक्ति के 100 शेयर बेचकर उन्हें अपने नाम स्थानांतरित करने का आरोप था। उसने कहा था कि यह सीए से संबंधित कार्रवाई नहीं है। वह अपने मुवक्किल का खाता प्रबंधन करता था, उसे सीए एक्ट के तहत सजा नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट का फैसला रद्द
जस्टिस आरएफ नारीमन और नवीन सिन्हा की पीठ ने यह आदेश देकर बंबई हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और सीए संस्थान कौंसिल की अपील स्वीकार कर ली। कोर्ट ने कहा कि सीए एक्ट की धारा 21(3) और 22 साफ कहती है कि सीए को प्रैक्टिस के दौरान पेशेवर गलतियों के अलावा और कोई आपराधिक और दीवानी अपराध करने पर भी दंडित किया जा सकता है। इसके लिए उसे सीए रोल से कुछ समय के लिए हटाया भी जा सकता है।
हाईकोर्ट ने गलती की
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में कानून समझने में गलती की है। हाईकोर्ट ने सीए को बरी करते हुए फैसले में कहा था कि सीए ने यह काम एक व्यक्ति के तौर पर किया जो पूरी तरह से कमर्शियल था। इसका सीए के काम से कोई लेना देना नहीं था, जब उसने शेयर बेचे उस समय वह सीए की हैसियत से काम नहीं कर रहा था।
तर्क ठुकराया
सुप्रीम कोर्ट ने उसका यह तर्क भी ठुकरा दिया कि उसका मुवक्किल के साथ समझौता हो चुका है। अब उनके बीच कोई विवाद नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट को वापस भेज दिया और आग्रह किया कि इसे फिर से सुने और तार्किक फैसला दे।
धारा 21(3) : अन्य कदाचार
संस्थान के सदस्य को जो प्रैक्टिस में हो या नहीं, अन्य कदाचार का दोषी माना जाएगा यदि वह-
(1) आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया जिसमें सजा छह माह से ज्यादा न हो
(2) कौंसिल की राय में किसी ऐसे कार्य से पेशे या संस्थान को बदनाम करता है जो पेशे से संबंधित हो या न हो
गैरपेशेवर गलती
इस मामले में भारतीय सीए संस्थान कौंसिल की अनुशासनात्मक समिति ने सीए को गैरपेशेवर कार्रवाई करने के लिए दोषी ठहराया था। उसे छह माह के लिए सीए रोल से हटाने की सिफारिश की थी। समिति ने कहा था कि सीए ने मुवक्किल के अनधिकृत रूप से शेयर बेचकर गैरपेशेवर गलती की है जिससे पेशा बदनाम हुआ है। यह हरकत सीए के प्रतिष्ठित पेशे के गौरव के विरुद्ध है।
पेशे को बदनाम करने पर सीए को दंड संभव – सुप्रीम कोर्ट

