पंकज श्रीवास्तव/पटना। शनिवार 2 मई को लगभग 50 युवा दानापुर स्टेशन पर पहुंचे तो लोगों को लगा कि जयपुर से आई विशेष ट्रेन से उतरे हैं लेकिन जब उनसे बातचीत की गई तो पता चला वे जयपुर से नहीं बल्कि दिल्ली से पैदल ही रेल पटरियों के रास्ते चले आ रहे हैं। इस बात की खबर प्रशासन को बिल्कुल भी नहीं थी, लेकिन जब पत्ररकारों के सवालों का जवाब इन युवाओं ने दिया तो पुलिसवालो के भी कान खड़े हो गए, और आनन फानन में इन सभी को कोरंटाइन के लिए भेजा।
शनिवार, 2 मई को राजस्थान से पहली विशेष ट्रेन श्रमिकों को लेकर दानापुर पहुँच रही थी। दानापुर पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 11 बजे था। ट्रेन लेट थी तो 1.30 में कैमरामैन जेपी श्रीवास्तव के संग दानापुर स्टेशन पहुंचा। अचानक मेरी नजर तकरीबन 20 युवाओं की टोली पर गयी। लगा हम लोग लेट पहुंचे ट्रेन आ गयी है। मैंने उनको रोक कर पूछा आपलोग राजस्थान से आ रहें हैं? जबाब मिला “नहीं दिल्ली से”। सुनकर हैरत हुई ये कौन सी ट्रेन दिल्ली से आ गयी। मैंने उनसे विस्तृत जानकारी चाही तो पता चला ये ट्रेन से नहीं पैदल ही दिल्ली से आ रहें हैं, वह भी रेलवे ट्रैक पकड़कर। पूरी जानकारी चाही तो पता चला इनकी संख्या 50 थी। कुछ रास्ते में हैं। रेलवे ट्रैक से सटे गांव वालों ने सज्जनता दिखाई कुछ खिला दिया तो सही नहीं दिया तो भी सही। जहां रात हुई वहीं सो लिये। तकरीबन 10 दिन की इस यात्रा के बाद वो दानापुर स्टेशन पहुंचे थे। हैरत देखिये पूरे चप्पे-चप्पे पर पुलिस भरी थी लेकिन किसी की नजर इन लोगों पर नहीं गयी। सवाल जबाब और कैमरे की चमक से पुलिसवालों की नींद टूटी और भागते हुए पास आये और उन सभी युवाओं को कोरंटाईन के लिए ले गये। सवाल यह है कि क्या इन्हीं वजहों से बिहार सरकार प्रवासी मजदूरों को प्रदेश में नहीं बुलाना चाहती थी कि लापरवाह प्रशासन उनका काम बढ़ाएगा, क्योंकि वे कत्तई काम के आदी नहीं है..!
पचासों मजदूर पैदल ही पहुंचे बिहार, पत्रकारों ने की बात तो जागी पुलिस

