4 अक्टूबर को शुक्रवार और नवरात्रि का योग है। नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और शुक्रवार को महालक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। शुक्रवार और नवरात्रि के योग में दुर्गाजी के साथ ही लक्ष्मीजी की भी पूजा करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए लक्ष्मी पूजा से जुड़ी खास बातें…
- शुक्रवार को स्नान के बाद घर के मंदिर में पूजा की व्यवस्था करें। सबसे पहले गणेशजी का पूजन करें। गणेशजी को स्नान कराएं, वस्त्र, प्रसाद, हार-फूल आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। देवी दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद महालक्ष्मी का पूजन करें। देवी लक्ष्मी की मूर्ति को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
- महालक्ष्मी को लाल फूल और पूजा की अन्य सामग्री जैसे- चंदन, अबीर, गुलाल, चावल आदि चढ़ाएं। खीर का भोग भी लगाएं। कमल गट्टे की माला से लक्ष्मी मंत्र का जाप करें। मंत्र- ऊं कमलवासिन्यै नम:
- इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। धूप-दीप और कर्पूर जलाकर आरती करें।
- अगर ये पूजा पति-पत्नी साथ बैठकर करते हैं तो ज्यादा शुभ रहता है। लक्ष्मीजी के साथ ही भगवान विष्णु की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा में लक्ष्मी-विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। इसके लिए केसर मिश्रित दूध का उपयोग करना चाहिए। पूजा के अंत में देवी से भूलचूक के लिए क्षमा याचना जरूर करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।
- देवी पूजा करने वाले भक्तों को अधार्मिक कामों से बचना चाहिए। घर में क्लेश न करें। जिन घरों में शांति रहती हैं, वहां देवी कृपा से सुख-समृद्धि बनी रहती है। पति-पत्नी को वाद-विवाद से बचना चाहिए।
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