निक्की शर्मा “रश्मि”/मुम्बई।
फैशन के बदलते दौर में एक फैशन नशा भी है,मजाक नहीं सचमुच यही सच है।आज युवावर्ग नशा केवल फैशन में करते हैं और धीरे धीरे इसका शिकार होते जाते हैं।फैशन कब लत बन जाती खुद इन्हें भी पता नहीं चलता।शौक या फैशन लत बन जाती है जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।लड़कियों की संख्या भी इसमें काफी ज्यादा है खासकर शहरों में।
आज युवा वर्ग नशे में खोता जा रहा है। नशे की लत उन्हें बर्बाद कर रही है ,चाहे वह लड़के हो या लड़कियाँ । लड़कों की संख्या ज्यादा है, हर 10 में से 8 या 9 युवा नशे की लत में। है ,चाहे वह सिगरेट की , शराब या गुटखा की, लेकिन वह सेवन करते ही है। लड़कियों की बात करें तो 100 में से 20 लड़कियाँ भी सिगरेट पीती हैं। शराब पीने की लत भी युवतियों में बहुत तेजी से बढ़ रही है । युवाओं में देखा देखी इसकी संख्या ज्यादा बढ़ती जा रही है। नशे की लत से परिवार में कलह तो बढ़ती ही है, साथ में धनहानि भी होती है।नशे से नुकसान होता है, यह पता है इसके बावजूद युवा पीढ़ी असंवेदनशील है।
आज कैंसर के मामले देश भर में बढ़ रहे हैं,लेकिन इस बीमारी को लेकर सोच नहीं बदल रहे खासकर युवा वर्ग में। कैंसर के मामले पहले से ज्यादा देशभर में सुनने को मिल रहे हैं, संख्या बढ़ती ही जा रही है।मुंबई के टाटा अस्पताल में हर साल 1200000 नए मरीज आते हैं,लाइफ स्टाइल में परिवर्तन, नशा, सिगरेट, तंबाकू का सेवन इसकी मुख्य वजह है। नशा बुरी चीज है जानते हैं, मानते हैं,फिर भी करते हैं। नशे की वजह से पूरा परिवार टूट जाता है बिखर कर रह जाता है। एक बार इस नशे की गिरफ्त में आ गए तो निकलना मुश्किल हो जाता है,फिर भी युवा वर्ग देखा देखी और फैशन में इसे अपना रहे हैं। नशा पान मसाला, गुटखा,शराब या सिगरेट की हो नुकसानदायक है। नशा कुछ पल के लिए हमारे दिमाग पर असर करता है, हम इस दुनिया से जैसे अलग हो जाते हैं कुछ पल के लिए सुकून मिलता है लेकिन शरीर पर असर हमेशा के लिए कर जाता है।नशे की लत युवा वर्ग में दोस्तों की संगत से बढ़ता ही जा रहा है उनके बहकावे में आकर युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। शौक से पीना और धीरे-धीरे आदत बना लेना, अधिक सेवन करने लगना यह कब शौक से नशा बन जाता है हमें पता ही नहीं चलता। युवा वर्ग फैशन के लिए तो यह अपना रहे हैं लेकिन धीरे-धीरे यह अपनी गिरफ्त में लेता चला जा रहा है युवा वर्ग को।दिखावा फैशन कब नशा बन जाता है उन्हें पता भी नहीं चलता, जब पता चलता है तो काफी देर हो चुकी होती है।
यह नशे की लत जब बढ़ जाती है तब शरीर पर ही नहीं पूरे परिवार पर भारी पड़ती है, परिवार अवसाद में आ जाता है, तनाव, जिंदगी में उदासी और खालीपन आ जाता है।मानसिक समस्या बढ़ जाती है। वक्त का तकाजा है बच्चों पर ध्यान दें, छोटे हो,बड़े हो समय दें, उनकी कार्यशैली, किसके साथ उठना बैठना, किन के साथ समय बिताते हैं यह देखें ।जिंदगी को खूबसूरत और आबाद रखना है तो बच्चों को समय दें, संतुलन बनाएं, घर में माहौल अच्छा रखें, बच्चों को सही गलत का रास्ता दिखाएं।शौक जब लत बन जाए तो काउंसलर की मदद ले, हो सके तो नशा मुक्ति केंद्र की मदद ले। बच्चे तो गलत राह पकड़ लेते हैं, पर पेरेंट्स ही उन्हें रास्ते पर लाने के लिए कोशिश कर सकते हैं, कामयाबी जरूर मिलेगी। वो तो बच्चे हैं,सही बुरे की समझ हमें ही समझाना होगा।”नशे की लत से युवा वर्ग को दूर ले ही जाना होगा”।
युवा वर्ग असंवेदनशील होती जा रही है ,जागरूक करने की जरूरत है, समाज के लिए यह चिंता का विषय है समाज में इसकी वजह से काफी परेशानी और चिंताजनक स्थिति है। आज कई जगह जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं इससे युवा वर्ग को इसके दुष्परिणाम के बारे में बताया जा रहा है। नशा से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी जा रही है। युवा वर्ग नशे की दलदल में फँसता जा रहा यह चिंता का विषय है क्योंकि युवा वर्ग से ही तो कल का समाज है अगर यही नहीं होंगे तो समाज कैसा ,जागरूकता अभियान के साथ आप भी दो कदम बढ़ाए युवा पीढ़ी को दलदल से बचाएंं ।

