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मोदी ने कहा- कोरोना से जीवन-मृत्यु की लड़ाई; लॉकडाउन से हुई परेशानी के लिए क्षमा मांगता हूं

Last updated: March 29, 2020 2:51 pm
Surabhi Saloni
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9 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली:लॉकडाउन के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देश से मुखातिब हुए। कार्यक्रम का यह 63वां संस्करण था। प्रधानमंत्री ने कहा- आमतौर पर मन की बात में कई विषयों को लेकर आता हूं। आज दुनियाभर में कोरोना संकट की चर्चा है। ऐसे में दूसरी बातें करना उचित नहीं होगा। कुछ ऐसे फैसले लेने पड़े हैं, जिनसे गरीबों को परेशानी हुई। सभी लोगों से क्षमा मांगता हूं। मैं आप सबकी परेशानी को समझता हूं, लेकिन कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इसके सिवाय कोई चारा नहीं था। किसी का ऐसा करने का मन नहीं करता, लेकिन मुझे आपके परिवार को सुरक्षित रखना है। इसलिए दोबारा क्षमा मांगता हूं। 24 मार्च को मोदी ने देश के नाम संबोधन में 21 दिन (14 अप्रैल) तक पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया था। 22 मार्च को मोदी की अपील पर देशभर में जनता कर्फ्यू था, लेकिन शाम को कई स्थानों पर लोग सड़कों पर देखे गए थे। देशभर में कोरोनावायरस के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

मोदी के मन की सबसे अहम बातें

1. धैर्य दिखाएं, लॉकडाउन का पालन करें

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां कहा गया है कि बीमारी से पहले ही इसके उपाय कर लेने चाहिए। कोरोना का इंसान को खत्म करने की जिद पर अड़ा है। इसलिए सब लोगों को एकजुट होकर लॉकडाउन का पालन करने का संकल्प लेना होगा। लॉकडाउन में धैर्य दिखाना ही है। कुछ लोग कोरोना गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि इस गलतफहमी में न रहें, कई देश बर्बाद हो गए। कोरोना से लड़ाई में कई योद्धा ऐसे हैं, जो अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

2. फाइटर्स अपनी कहानियां शेयर करें
कोरोना फाइटर्स से बात करके मुझे भी प्रेरणा ली। कोरोना से ठीक हुए राम कुमार ने बताया कि मैं आईटी कंपनी में काम करता हूं। पिछले दिनों दुबई गया था, वहां से लौटा तो संक्रमण का पता चला। हॉस्पिटल में कुछ दिन तो मुझे बहुत अजीब लगा। डॉक्टरों और नर्स ने मुझे दिन में 2 से 3 बात कर ठीक होने का भरोसा दिया। परिवार को जब पता चला तब मैं क्वारैंटाइन में था। अब दिनभर अपने अलग कमरे में रहता हूं। मोदी ने राम से कहा कि आपको अपने अनुभव का ऑडियो बनाकर इंटरनेट पर डालें, ताकि लोग प्रेरणा ले सकें।

3. आगरा के बुजुर्ग ने कहानी बताई
73 साल के अशोक कपूर ने कहा- मेरे दो बेटे काम से इटली गए थे। जब वापस आए तो इन्हें कुछ दिक्कत हुई। वे दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल गए, वहां टेस्ट पॉजिटिव आया। इसके बाद हमारे 6 अन्य लोग भी सफदरजंग हॉस्पिटल में पॉजिटिव मिले। हमें एंबुलेंस से आगरा से दिल्ली ले जाया गया। अस्पताल में मुझे और परिवार को कोई दिक्कत नहीं हुई। डॉक्टर और नर्स का व्यवहार बहुत अच्छा रहा। हॉस्पिटल स्टाफ के आभारी हैं। खुशी है कि मेरी आपसे बात हुई। हम सब स्वस्थ हैं। मोदी ने कहा- आप आगरा में लोगों को नियमों का पालन करने के लिए कहिए। भूखों को भोजन कराएं। हम आपकी हिम्मत और समझदारी का सम्मान करते हैं।

4. प्रधानमंत्री ने कुछ डॉक्टरों से भी बात की
दिल्ली से डॉ. नितेश ने कहा कि हम आर्मी मोड में लोगों की सेवा में लगे हैं। जो जरूरी चीजें हैं, वे आप मुहैया करा ही रहे हैं। हम मरीजों को समझाते हैं कि घबराएं नहीं। 14-15 दिन में ठीक हो जाएंगे। उसके बाद जब टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आएगी तो आप घर जा सकते हैं। हम अपनी टीम को प्रोत्साहित करते हैं कि मरीजों का बेहतर इलाज और खुद की सुरक्षा के सतर्क रहें। मोदी ने कहा- दुनिया का अनुभव बताता है कि इस बीमारी का संक्रमण अचानक बढ़ता है। भारत में ये स्थिति न आए इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करना है।

5. पुणे के अस्पताल से 16 मरीज ठीक होकर घर गए
पुणे के एक डॉक्टर ने बताया कि हमारे हॉस्पिटल में 16 संक्रमित आए थे, जिनमें से 7 को हम ठीक कर डिस्चार्ज कर चुके हैं। बाकी 9 का इलाज चल रहा है। रोजाना उनकी जांच और काउंसलिंग कर रहे हैं। 4-5 दिन में उनकी हालत भी ठीक हो जाएगी। अगर कोई संदिग्ध पाया जाता है तो उन्हें होम क्वारैंटाइन करते हैं। संक्रमण से बचने के लिए घर में भी बार-बार हाथ धोएं। हम लोगों को बताते हैं कि आप 14 दिन के लिए घर में ही रहें और क्वारैंटाइन रहें। हमें विश्वास है कि यह लड़ाई जीतेंगे। मोदी ने कहा- साथियों हमें डॉक्टरों की सलाह और उनकी कही बातों को जीवन में उतारना है। आचार्य चरक ने कहा है कि धन और किसी खास कामना के लिए नहीं, बल्कि जो मरीज की भावना के लिए काम करता है, वही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक है।

6. लोगों की मदद में जुटे लोगों को धन्यवाद करें
डॉक्टर, नर्स और आप जैसे अन्य साथियों की मदद से ही हम कोरोना के खिलाफ जंग लड़ पा रहे हैं। हमने इन लोगों के लिए 50 लाख के हेल्थ कवर का प्रावधान किया है। बेंगलुरु के निरंजन ने लिखा है कि ऐसे लोग डेली लाइफ के रियल हीरो हैं। आज अपने पास की किराना दुकान चलाने वाले, ड्राइवरों के बारे में सोचिए जो जोखिम उठाकर भी लोगों की सेवा में लगें हैं। बैंकिंग कर्मचारी भी सतत काम में जुटे हैं। हमें घर तक डिलीवरी पहुंचाने वाले ई-कॉमर्स कर्मचारियों का भी धन्यवाद देना चाहिए।

7. सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाएं, इमोशनल डिस्टेंसिंग घटाएं
कुछ ऐसी बातें पता चली हैं कि लोग होम क्वारैंटाइन वालों के साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। ये गलत है। हमें वायरस को रोकने के लिए क्वारैंटाइन करना है, लेकिन समाज से कटना नहीं है। कुछ दिन की सोशल डिस्टेंसिंग करनी है। हमें उनके साथ अपने रिश्ते को बनाए रखना है। आज समय है, रिश्तों में नई जान फूंकें। मैं कहता हूं कि सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाओ, इमोशनल डिस्टेंसिंग घटाओ।

8. संकट में फंसे लोगों की मदद करें
कुछ लोगों ने पूछा है कि मैं नवरात्रि में कैसे रहता हूं। मैंने आपसे कहा है कि घरों में रहो, लेकिन खुद के मन में झांको। हमें लक्ष्मण रेखा का पालन करना है। मैं फिटनेस ट्रेनर नहीं हूं, लेकिन योग के कुछ आसनों से मुझे लाभ मिला है। इसलिए लॉकडाउन के दौरान आप भी इन्हें कर सकते हैं। लॉकडाउन के दौरान अगर हमें पता चले कि कोई गरीब भूखा या संकट में है तो हम पहले उसकी मदद करेंगे। हमें आज देश को बचाने के लिए सारी दीवारें तोड़ना है। आप घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए, हमें ये जंग जीतना है। आप सभी को मेरी शुभकामनाएं।

‘संक्रमण चक्र तोड़ना होगा’
24 मार्च को मोदी ने कहा था, “हिंदुस्तान को बचाने के लिए 21 दिन का यह लॉकडाउन बेहद जरूरी है। यह जनता कर्फ्यू से ज्यादा सख्त होगा और यह एक तरह से कर्फ्यू ही है। बाहर निकलना क्या होता है, यह 21 दिन के लिए भूल जाइए। 21 दिन नहीं संभले तो आपका देश और आपका परिवार 21 साल पीछे चला जाएगा। कोरोना से मुकाबले के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। हमें संक्रमण के चक्र को तोड़ना होगा। कोरोना से तभी बचा जा सकता है, जब घर की लक्ष्मण रेखा न लांघी जाए।”

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