आत्महित का रखे ध्यान : आचार्य महाश्रमण
01-03-2020, रविवार, इचलकरंजी, महाराष्ट्र। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे हुए पांडाल में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में अपने आराध्य को देखने, सुनने की उत्कंठा भक्ति का नायाब दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। एक और सभा में जहां भारत के प्राचीन संतों के फोटो लगे हुए थे वहीं दूसरी ओर बैनर पर ज्ञान से संबंधित स्लोगन सभी को आत्मिक ज्ञान पाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। ऐसा नयनाभिराम दृश्य था इचलकरंजी के ज्ञान चेतना समवसरण का। तीन दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन की प्रातः शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण ने नगर के राजस्थानी भवन, महावीर भवन एवं वासुपूज्य सेवा ट्रस्ट हॉस्पिटल को अपने पावन चरणों से कृतार्थ किया। इस दौरान नगर में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा संकल्प मैराथन का भी आयोजन आयोजन हुआ जिसमें युवकों ने सभी को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित किया।
मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हुए ज्योतिचरण श्री महाश्रमण ने कहा–आत्मा और शरीर दो तत्व है। इन दोनों के द्वारा जीवन अस्तित्व में आता है। कोरा शरीर जीवन नहीं और कोरी आत्मा जीवन नहीं होता। मृत्यु के बाद डेड बॉडी निर्जीव हो जाती है। उसमें से आत्मा चली गई वहां जीवन नहीं है। जीवन वहीं जहां दोनों मिले हुए हो। शरीर आत्मा का वियोग मृत्यु है और अगर हमेशा के लिए आत्मा शरीर से मुक्त हो जाए वह स्थिति मोक्ष हो जाती है।
आचार्य श्री ने आगे ने आगे समझाते हुए कहा कि जैन धर्म का सिद्धांत है आत्मा शरीर अलग-अलग है। साधना यह करनी है कि साधक अपने आपको आत्मा के रूप में अनुभव करें। जैसे सोना मिट्टी में मिला हुआ होता है परंतु मिट्टी और सोना अलग-अलग है। वैसे ही आत्मा शरीर से अलग है। आत्मा कर्मों से मिली हुई हो तो निखरित रूप नहीं आएगा। हम सोचे की आत्मा के लिए क्या करते है। शरीर अस्थाई और आत्मा स्थाई है। व्यक्ति आत्मा के लिए ईमानदारी जीवन में अपनाए। अहिंसा के पथ पर चले। किसी से मारपीट, झगड़ा नहीं करे। समता भाव रखे। संयम के साथ अगर धर्माराधना आ जाये तो मानो आत्मा के लिए कुछ कर सकते है। आत्महित के लिए सैदेव जागरूक रहे। यह कमनीय है।
कार्यक्रम में इस अवसर पर सांसद श्री धैर्यशील माने, विधायक श्री प्रकाशराव आवाड़े, पुर्व सांसद श्री कल्पाअण्णा आवाड़े ने भी शांतिदूत का अभिनंदन किया। व्यक्तव्य के क्रम में साध्वीश्री अमितरेखाजी, अभातेमम कार्यकरिणी सदस्य जयश्री जोगाड़, तेमम अध्यक्ष श्रीमती सीमा डागा, तेरापंथ सभा मंत्री श्री पुष्पराज सकलेचा, अभातेयुप जेटिएन से संजय वेदमुथा, तेयुप अध्यक्ष प्रवीण भंसाली, दिनेश छाजेड़, ज्ञानशाला से भारती सकलेचा आदि अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभा के सदस्यों ने गीत का संगान किया।
महातपस्वी के चरणों में तप की भेंट
पूज्य महातपस्वीश्री महाश्रमणजी के इचलकरंजी पदार्पण पर तप की भेंट चढ़ाते हुए मासखमण के के तप में श्रीमती संतोष महावीर आंचलिया ने 30 दिन, श्रीमती मीना प्रवीण भंसाली ने 27 दिन एवं केवलचंद जी धेलडिया ने 30 दिन की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।
विविध कार्यक्रम आयोजित
शांतिदूत के पदार्पण पर तेरापंथ समाज द्वारा एकता महाप्रज्ञ के नाम संगीत संध्या का आयोजन हुआ। जिसमें प्रसिद्ध गायकों ने गीतों की प्रस्तुति दी। ज्ञानशाला द्वारा एक दिवसीय बालक बालिकाओं का शिविर भी आयोजित हुआ। कल का मुख्य कार्यक्रम जैनम जयतु शासन पर आधारित है जिसमें दिगंबर आचार्यश्री प्रज्ञासागरजी भी अपना सानिध्य प्रदान करेंगे।
समाज भूषण अलंकरण की घोषणा
इस अवसर पर जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के अध्यक्ष श्री सुरेशचंद गोयल ने श्री कन्हैयालाल जी छाजेड़ (श्रीडूंगरगढ़ ) को समाजभूषण अलंकरण देने की घोषणा की।

