जीवन में धर्म लाता है सरलता : आचार्य महाश्रमण
04-03-2020, बुधवार, जयसिंहपुर, महाराष्ट्र। जयसिंहपुर नगर में आज चारों ओर उत्सव का माहौल नजर आ रहा था। जैन ही नहीं अपितु जैनेत्तर समाज के भी सैकड़ों लोग अहिंसा यात्रा प्रणेता के स्वागत में खड़े थे। तेरापंथ के नवमाचार्य श्री तुलसी के पश्चात 52 वर्षों के अंतराल से तेरापंथ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण जी के पदार्पण पर जयसिंहपुर वासियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। प्रातः सूर्योदय की वेला में दीप नगर से शांतिदूत ने मंगल विहार किया। जैसे ही पूज्य गुरुदेव जयसिंहपुर प्रवेश द्वार पर पहुंचे वहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयघोष से पूरा वातावरण महाश्रमणमय बना दिया। श्रावक समाज की अर्ज पर आचार्य श्री जनतारा हाई स्कूल में पधारे एवं वहां हजारों विद्यार्थियों को अहिंसा यात्रा के संकल्प करवाकर अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दी। भव्य विशाल जुलूस में विभिन्न झांकियों के साथ-साथ अनेक समाज के लोग शांतिदूत का अभिनंदन कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र राज्य मंत्री राजेंद्र पाटील यड्रावकर आदि अनेक गणमान्य भी जुलूस में शामिल हुए।
जैन समाज के साथ-साथ मराठा मंडल, माहेश्वरी समाज, मुस्लिम समाज, गणेश उत्सव मंडल, मारवाड़ी युवा मंच, धनंजय महादिक युवा शक्ति मंडल, लॉयन क्लब, IMA और JMA के डॉक्टर्स, कामगार संगठन, रोटरी क्लब, NCC केटेडस सहित अनेक संगठनों के सदस्यों ने मानवता के मसीहा आचार्य श्री महाश्रमण का स्वागत किया। रेली के साथ आचार्यवर का तेरापंथ भवन में दो दिवसीय प्रवास हेतु पदार्पण हुआ। स्वागत समारोह में अमृत देशना देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा–हम सभी का परम लक्ष्य निर्वाण है। निर्वाण की दिशा में हम गतिशील बन सके। कई जन्मों के पुरुषार्थ के बाद निर्वाण प्राप्त हो सकता है। प्रश्न होता है कि निर्वाण को कौन प्राप्त कर सकता है। जिसके जीवन में धर्म होता है, साधना होती है वही निर्वाण प्राप्त कर सकता है। धर्म करने वाला ही मुक्ति को प्राप्त कर सकता है, मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप की आराधना ही धर्म है। अगला प्रश्न है कि धर्म कौन कर सकता है? जिसका मन शुद्ध होता है, आत्मा-चेतना शुद्ध होती है वह धर्म कर सकता है।
पूज्यवर ने आगे कहा कि जो सरल होता है, ऋजुता जिसमें होती है वह शुद्ध होता है। शुद्ध होने के लिए ऋजु होना आवश्यक है। पवित्रता शुद्धता का एक महत्वपूर्ण आधार है मन का सरल होना। जहां कपट, धोखेबाजी होती है वहां शुद्धता नहीं रहती। हमारे कार्य में पारदर्शिता रहे। व्यापार, व्यवहार में बातचीत में निश्छलता रहे। मन, वाणी, कर्म में समानता नहीं तो व्यक्ति निर्मल नहीं होता। कथनी-करनी व्यक्ति की एक रहे। सच्चाई सरलता की संपत्ति हमारे जीवन में रहे यह काम्य है। तत्पश्चात आचार्य श्री ने जयसिंहपुर वासियों को अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्प स्वीकार करवाएं।
असाधारण साध्वी प्रमुखा श्री कनक प्रभा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 52 वर्षों पूर्व आचार्य तुलसी अणुव्रत का संदेश लेकर यहां आए थे। आज आचार्य श्री अहिंसा यात्रा के साथ यहां पधारे हैं। इतिहास स्वयं को दोहराता है। सभी अहिंसा यात्रा में सहभागी बने। आचार्य श्री के दो दिन के प्रवास में जनता भी सन्मार्ग को अपनाकर जीवन को अच्छा बनाएगी।
इस अवसर पर कार्यक्रम में स्वागत हेतु दिगंबर संप्रदाय के मुनि प्रसंगसागर जी, नांदणी मठ के स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक जी ने अपने विचार रखें। महाराष्ट्र राज्य मंत्री राजेंद्र पाटील यड्रावकर, पूर्व सांसद राजू शेट्टी, नगराध्यक्ष नीता माने पाटील ने भी शांतिदूत का अभिनंदन किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष अशोक रुणवाल व स्वागत समिति अध्यक्ष संजय घोड़ावत ने भाव अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल एवं ज्ञानशाला के 52 सदस्यों ने स्वस्तिक के आकार में स्वागत गीत की प्रस्तुति दी ।

