मुंबई ऐसी जगह है जहां देश के विभिन्न हिस्सों से रोजी-रोटी की तलाश में आए लोग रहते हैं। कुछ यहां बस जाते हैं तो कुछ अपने मुलुक वापस लौट जाते हैं। कुछ तो मुंबई को ही अपनी कर्मभूमि मान यहां अपनी संस्कृतियों को संजोए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करते हैं। बिहार के लोग मेहनती, पढ़ाकू और कहीं भी अपनी जगह बनाने के लिए मशहूर हैं। मुंबई में भी अच्छी संख्या में बिहार प्रवासी रहते हुए यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अपना स्थान बनाने में कामयाबी भी हासिल की है। बिहार के लोग मेहनत के साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आइए, एक नजर डालते हैं बिहार के लोगों द्वारा स्थापित संस्था ‘बिहार सरस्वती सेवा समिति’ विरार (पश्चिम) पर।
सन् 2004 में एक छोटे से घर में पूजा की शुरुआत की गयी और बीतते समय के साथ इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई की इस पूजा समिति को एक सशक्त संस्था का रूप देने का निश्चय किया गया। संपूर्ण बिहार के लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई जिसके फलस्वरूप इसका दायरा मिथिलांचल से बढ़ाकर संपूर्ण बिहार के लिए रखने का निर्णय लिया गया और सर्व सम्मति से इसका नाम बिहार सरस्वती सेवा समिति रखा गया। सन् 2010 में सात संस्थापक सदस्यों श्री आनंद मोहन झा, श्री किशोर झा, श्री विष्णु झा, श्री मिथिलेश झा, श्री अवधेश सिंह, श्री अशोक झा और श्री अरविंद झा द्वारा विधिवत् पंजीकृत किया गया। संस्था का प्रथम अध्यक्ष श्री आनंद मोहन झा, प्रथम सचिव श्री अवधेश सिंह और प्रथम खजांची श्री किशोर झा बने।
सन् 2010 से 2014 के प्रथम तिमाही तक का कार्यकाल बहुत सराहनीय रहा है। सन् 2014 में चुनावी प्रक्रिया से पुन: एक नई कमिटी का गठन हुआ जिसका अध्यक्ष श्री कमलकांत मिश्रा, सचिव श्री विष्णु झा और खजांची श्री जितेन्द्र झा जी बने। नई मैनेजिंग कमिटी के गठन में इस बात पर बल दिया गया कि संस्था में विरार के चारों तरफ से सदस्यों को सम्मिलित कर इसका विस्तार किया जाय, फलस्वरूप बोलिंज से श्री देवकान्त झा, डोंगरपाड़ा से श्री प्रकाश सिंह, ग्लोबल सिटी से श्री कमलकांत मिश्रा, मनवेलपाडा से श्री जितेन्द्र झा, यशवंत नगर से श्री अशोक झा और श्री रघुनंदन शाह, विराट नगर से श्रीराम मिश्रा, श्री अवधेश सिंह , श्री दयानंद ठाकुर और श्री प्रदीप झा को कमेटी में शामिल किया गया।
विगत 15 वर्षों से विरार पश्चिम में सरस्वती पूजा का आयोजन हो रहा है, जहाँ प्रतिवर्ष लगभग दस हजार लोग इकट्ठा होते हैं। सरस्वती पूजा के अलावा डोंगरपाड़ा तालाव पर छठ पूजा का आयोजन भी कई सालों से बिहार सरस्वती सेवा समिति करती आ रही है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु छठ मईया का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक कार्य के अलावा संस्था द्वारा बिहार के असहाय और निर्धन लोगों को यथा संभव आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। गरीब विद्यार्थियों के लिए विरार पूर्व के सहकार नगर में करीब 50,000/- रुपये के नोट बुक का वितरण किया गया। प्राय: देखा गया है कि विद्यार्थी दशवीं और बारहवीं के बाद अपने कैरियर को लेकर भ्रमित रहते हैं। उनकी इस समस्या को देखते हुए विरार पश्चिम के आत्माराम पार्क में करीब 200 दशवीं तथा बारहवीं के विद्यार्थियों को ध्येया कंसल्टेंट, पुणे द्वारा फ्री काउन्सलिंग की व्यवस्था की गई जिससे बहुत विद्यार्थी लाभान्वित हुए।
हमारी संस्था के कुछ लोग शास्त्री विद्यालय, विरार पूर्व के संपर्क में हैं जहाँ हर साल पच्चीस गरीब विद्यार्थियों का फीस भरने पर विचार चल रहा है। पंद्रह बच्चे का नाम पहले चरण में आ चुका है और दस बच्चे का नाम दूसरे चरण में आने की संभावना है। पिछले कुछ सालों से संस्था द्वारा शैक्षणिक सहायता के अलावा गंभीर बिमारी से ग्रसित बिहारी निर्धन लोगों के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में पिछले साल वसंत पंचमी के दिन सामाजिक कल्याणार्थ एक एम्बुलेंस का लोकार्पण वसई विरार शहर महानगरपालिका के प्रथम महापौर श्री राजीव पाटील द्वारा किया गया, जिससे कई लोगों को इस सेवा का लाभ मिला।
संस्था के सदस्यों के अनुसार, संस्था का उद्देश्य सभी जाति, धर्म के लोगों को बिना किसी भेदभाव किये हुये जरुरत मंद लोगों तक यथा संभव सहायता प्रदान करना। कुछ लोग संस्था की मदत से अपनी पढ़ाई पूर्ण करके एक मुकाम हासिल कर चुके हैं जिसमें कुछ इंजिनियर और डॉक्टर भी शामिल हैं। संस्था उन सभी लाभान्वित को शुभेच्छा देना चाहती है और उनसे एक अपेक्षा भी रखती है कि आप भी भविष्य में परोपकार की भावना को जीवंत बनाये रखें, जिससे किसी निर्धन परिवार के बच्चे को धन के अभाव में शिक्षा छोड़नी नहीं पड़े। आने वाले वर्षों में बिहार सरस्वती सेवा समिति द्वारा अनेको सामाजिक सहायता कार्य का प्रावधान है। संस्था हमेशा प्रयत्नशील रहती है कि कम से कम वसई विरार शहर महानगर पालिका क्षेत्र में आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बिहारी को प्राण नहीं गँवाना पड़े और न ही किसी का शिक्षा वाधित हो।
सामाजिक समरसता और सौहार्दपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल ग्लोबल सिटी के क्लब वन में होली हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें प्रख्यात राष्ट्रीय कवियों को आमंत्रित किया गया था जो पुर्णतया सफल और यादगार रहा। वसंत पंचमी के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रथम दिन हमारे अपने बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है जिससे बच्चों में बौद्धिक विकास, आत्मविश्वास, सामाजिक मेल भाव आदि जागृत होती है। मिथिला की प्रसिद्ध पेंटिंग, पुस्तक, मिथिला का सम्मान पाग, जेनऊ इत्यादि का प्रदर्शनी वसंत पंचमी के अवसर पर लगाया जाता है।
पिछले कई वर्षों से बिहार सरस्वती सेवा समिति अपने समाजभवन के लिए एक भुमि खण्ड की तलाश में है। ताकि यहां बिहार भवन बनाया जा सके जहां बिहार से कोई छात्र यदि मुम्बई में हायर एजुकेशन के लिए ठहरना चाहे तो उसे यहाँ ठहराया जा सके। माड़वारी समाज, गुजराती समाज के लिए मुम्बई में ऐसी सुविधा जगह जगह उपलब्ध है लेकिन बिहारियों के लिए अभी तक नहीं है।
मेहनत ही नहीं, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों में भी अग्रणी हैं बिहार के लोग

