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मधुमेह से पीड़ित लोग रोजे के दौरान बरतें ये सावधानियां

Last updated: May 19, 2019 7:54 am
Surabhi Saloni
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4 Min Read
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आंकड़ों के अनुसार, भारत में तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है और उनमें से अधिकांश लोग रमजान के दौरान रोजा रखते हैं। इनमें मधुमेह वाले लोग भी शामिल हैं और इस प्रकार, सावधानी बरतना समय की आवश्यकता है। रोजा मैटाबोलिज्म में बदलाव ला सकता है और रमजान के दौरान मधुमेह पीड़ितों को अपनी आहार योजना समायोजित कर लेनी चाहिए।
रमजान में भोजन के बीच में 12 से 15 घंटे का अंतर होता है, जो मधुमेह के रोगियों के लिए एक समस्या बन सकता है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से और समय पर भोजन करें। टाइप 1 मधुमेह वाले लोग पवित्र महीने के दौरान उपवास करते समय टाइप 2 वाले लोगों की तुलना में अधिक जोखिम में होते हैं।
इस बारे में बात करते हुए, पद्म श्री अवार्डी, एचसीएफआई के अध्यक्ष, डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, “यह रमजान जून के महीने तक जारी रहेगा और उपवास की अवधि दिन के धूप भरे घंटों के कारण लंबी होगी। यह जरूरी है कि मधुमेह से पीड़ित लोग अपने चिकित्सक से परामर्श करें और नियमित रूप से रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करें। टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों और आवर्तक हाइपोग्लाइसीमिया के इतिहास वालों में उपवास के दौरान अधिक जोखिम होता है। टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में, हाइपो और हाइपरग्लाइसेमिया की संभावना है। रोगी को उपवास का निर्णय जोखिमों के विषय में चिकित्सक से पर्याप्त परामर्ष करके ही लिया जाना चाहिए। उपवास पर जोर देने वाले रोगियों को रमजान से पहले परीक्षण करवा लेने चाहिए और शारीरिक गतिविधि, भोजन योजना, ग्लूकोज की निगरानी व खुराक और दवाओं के बारे में उचित निर्देश प्राप्त कर लेने चाहिए। प्रबंधन योजना को अत्यधिक व्यक्तिगत बनाया जाना चाहिए। जटिलताओं के विकास के जोखिम को कम करने के लिए क्लोज फॉलो-अप आवश्यक है।“
नोट करने लायक कुछ लक्षणों में रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव, दौरे, बेहोशी, धुंधली दृष्टि, सिरदर्द, पसीना, थकान में वृद्धि, और प्यास शामिल हैं। इनमें से किसी भी लक्षण के बने रहने पर रोगी को उपवास छोड़ देना चाहिए।
रमजान में, एक महीने का निरंतर उपवास मन, शरीर और आत्मा को डिटॉक्स करता है और मनुष्य को पुनर्जन्म देता है। सावधानी बरतने से लोगों को उपवास के दौरान भी अपनी स्वास्थ्य स्थितियों पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
एचसीएफआई के कुछ सुझाव
ब्लड शुगर लेवल की अक्सर निगरानी करें।
ज्यादा भोजन न करें। शरीर के संकेतों पर ध्यान दें और भूख को समझें।
निर्जलीकरण से बचने के लिए चीनी मुक्त और डिकैफिनेटेड पेय के साथ उपवास को तोड़ना सुनिश्चित करें।
सीमित मात्रा में मिठाई का सेवन करें।
अपने आहार में बहुत सारे फल, सब्जियां, दालें और दही को शामिल करना सुनिश्चित करें।
भोजन और नींद के बीच कम से कम 2 घंटे का समय अंतराल दें। सोने से ठीक पहले जटिल कार्बोहाइड्रेट से बचना एक अच्छा विचार है।
डीप फ्राइड खाद्य पदार्थों से बचें। इसके अलावा, चावल और रोटियों जैसे स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन का समय सुनिश्चित करें।

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