लोकसभा चुनाव में इस बार क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन पर राष्ट्रीय दलों का भविष्य टिका है। क्षेत्रीय दल स्वतंत्र रूप से भी चुनाव लड़ रहे हैं और गठबंधन में शामिल होकर भी। दोनों स्थितियों में उनका प्रदर्शन नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण साबित होगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन पिछली चुनाव से अच्छा रहता है तो इसका असर केंद्र में नई सरकार के गठन पर पड़ेगा।
पिछले लोकसभा चुनाव में कई क्षेत्रीय दल खाता नहीं खोल पाए थे। कई दलों की सीटें एक अंक में ही सिमट कर रह गई थी। लेकिन इस बार की परिस्थितियां अलग हैं। किसी दल के पक्ष या विरोध में लहर नहीं होने के कारण क्षेत्रीय दलों के फिर से अपने-अपने सूबों में मजबूती से उभरने के आसार हैं। दूसरे, कई क्षेत्रीय दलों और छोटी पार्टियां को एनडीए या यूपीए गठबंधनों में सीटों में अहम हिस्सेदारी मिली है। इसलिए यह माना जा रहा है कि इस बार इन दलों का प्रदर्शन पहले से बेहतर हो सकता है।
तृणमूल का प्रदर्शन शानदार था
पिछले चुनाव में अन्नाद्रमुक, बीजद, तृणमूल कांग्रेस, टीआरएस आदि का प्रदर्शन शानदार रहा था। ये दल अपने प्रांतों में अच्छी सीटें जीतने में कामयाब रहे। एनडीए के साथ खड़े कई क्षेत्रीय दलों ने भी अच्छी सीटें जीती थीं जिसमें शिवसेना, टीडीपी, लोजपा, रालोसपा तथा कुछ और छोटी पार्टियां शामिल हैं। जबकि बसपा, द्रमुक जैसे दल खाता नहीं खोल पाए थे। जदयू, राजद, सपा जैसी बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां भी चार-पांच सीटों तक सिमटकर रह गई। इसी प्रकार वामदलों का प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा। इस बार वामदल केरल में बेहतर कर सकते हैं।
सपा-बसपा की स्थिति बेहतर संभव
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन चुनावों में बीजद, तृणमूल, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस से मिल रही चुनौती के बावजूद ठीकठाक रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा की स्थिति बेहतर हो सकती है। बिहार में जदयू तथा राजद जैसी पार्टियों के सीटों में भी इजाफा होगा। द्रमुक इस बार अन्नाद्रमुक पर भाड़ी पड़ती दिख रही है। इसी प्रकार महाराष्ट्र में कई छोटे-छोटे दल हैं जो एक-एक, दो-दो सीटों पर जीत दर्ज करा सकते हैं।
सरकार बनाने में भूमिका अहम
माना जा रहा है कि यदि क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन अच्छा रहता है और उनकी सीटें बढ़ती हैं तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान सत्तारूढ़ एनडीए को होगा। क्योंकि पिछली बार उसने शानदार जीत दर्ज की थी। दूसरे, क्षेत्रीय दलों के अच्छे प्रदर्शन से गठबंधन सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो जाएगी। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय दलों दलों की झोली में 150 से अधिक सीटें तक जा सकती हैं।
लोकसभा चुनाव: क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन तय करेगा नई सरकार का भविष्य

