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खुदा का रूप धरातल पर हमारी गुरूवर्या

Last updated: February 20, 2020 8:55 am
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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16 वे दीक्षा दिवस की आत्मीय अभिवन्दना
माता पिता ने हमें जन्म दिया, वे महान हैं, पूज्य हैं सत्य है उनका स्थान ऊंचा है किंतु उनसे भी महान है गुरु। गुरु हो उठी हुई उंगली है जो नित्य आत्मा से परमात्मा की ओर संकेत करती है उसी उंगली का उपकार है कि हम परमात्मा को जान पाए । सतगुरु की महिमा अनंत है छत पर पहुंचने के लिए सीढी एकमात्र सहारा होती है सीढी के बिना छत पर चढ़ना मुश्किल है उसी प्रकार हमारे जीवन में गुरु सीढ़ी और परमात्मा छत है
guru is a light ,
करते हमको bright ,
guru is a pride ,
करते हमको guide
आपका जीवन जप तप त्याग संयममय , साधनामय, स्वाध्यायमय है
जिनके मुख पर तेज और तेजस से सौम्यता,
जिन की वाणी में ओज और ओज से मधुरता
जिनके कार्य में शौर्य और शौर्य में दक्षता
जिनके हृदय में वात्सल्य और वात्सल्य में पवित्रता
जिनके जीवन में अध्यात्म और अध्यात्म में सरलता
ऐसी गुरूवर्या को मेरा शत शत वंदन
कहते हैं तारों में चमक होती है महक नहीं होती , फूलों में महक होती है चमक नहीं होती, किंतु गुरु में तो गुणों की महक भी होती है और चमक भी, फुल से तो मात्र सुवास व दीप से मात्र प्रकाश की ही दास्तान मिलती है किंतु गुरु से क्या नहीं मिलता इसीलिए गुरु को कल्पतरू भी कहा जाता है । जो सभी की अध्यात्म जगत की कामनाओं को पूर्ण करते हैं लोग कहते हैं हमने खुदा को नहीं देखा लेकिन मैंने खुदा को अपने गुरूवर्या में देखा है जो शायद खुदा के रूप में इस धरातल पर सभी को अपने ज्ञान से आलोकित और प्रकाशित कर रही है जिनके मुख में सरस्वती का वास है जिनकी आत्मा में अरिहंत का वास है इतना ही कहूँगी करोड़ साल बीतने पर भी किसी सूरज का उदय होता है लाख हिरण के खोजने पर एक कस्तूरी मृग मिलता है , हजार मोती कवच खोजने पर किसी एक में असली मोती मिलता है, हज़ार वस्तु खोजने पर एक वस्तु मिलती है, ठीक उसी प्रकार जीवन में सैकड़ों लोग मिलते हैं, पर आप जैसे सद्गुरु एक बार ही मिलते हैं, ऐसे महान उपकारी परम पूज्या गुरूवर्या श्री विश्ववंदना जी म.सा.आपको दीक्षा दिवस पर अंतर दिल से हार्दिक अभिनंदन
आप सूरज सी रोशनी रखती है
आप अनन्त आकाश सा तेज़ रखती हैं।
मिलेंगे काँटे ही काँटे आपको पग पग पर,
पता हैं इनसे गुजरने का आप हौंसला रखती है।
आपकी चरण रज
गुरु भक्त

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