मुंबई। श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन, तेरापंथ भवन कांदिवली में धर्म अध्यात्म की गंगा बह रही है। यहां हर दिन आसपास के उपनगरों से श्रावक-श्राविका प्रवचन में पहुंचकर अध्यात्म का रसपान कर रहे हैं। यहां चातुरमासार्थ विराजित डॉ. मुनि महेंद्रकुमार जी के सहवर्ती मुनि श्री जागृति मुनि जी ने मंगलवार को अपने प्रवचन में साहस के बारे में बताया और तेरापंथ धर्म संघ के साधु-साध्वीवृन्द के जीवन चरित्र का उदाहरण देते हुए उनसे प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित किया।
मुनिश्री अभिजीत कुमार जी ने जम्बुकुमार के साहस के बारे में बताया कि किस तरह उन्होंने महावीर स्वामी के संदेशों के साथ अकेले लाखों लोगों से लोहा लिया और कहा कि उनके पास महावीर का संदेश था इसलिए वे निडर रहे। तमाम समस्याओं से निजात अगर कोई चीज़ दिला सकता है तो वह है महावीर स्वामी का संदेश। चार शस्त्र – 1. अभय, सच के लिए अभय होना चाहिए। 2. अहिंसा, जीतना है लेकिन लड़ झगड़ कर नहीं बल्कि दिल जीतना है। 3. मनोबल, मनोबल है तो इंसान की ताकत खुद ब खुद बढ़ जाती है और चौथा आत्मबल।
उन्होंने पारिवारिक समस्याओं का समाधान देते हुए कहा कि बेटों की परवरिश छोटा-बड़ा बेटा सोचकर नहीं बल्कि सिर्फ बेटा समझकर करें तो उनमें कोई समस्या नहीं होगी। जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है। अपने बचाव में की जाने वाली हिंसा को उचित माना गया है।
जैन विद्या एवं संबोधि पर व्याख्यान देते हुए मुनि सिद्धकुमार जी ने बताया कि भोजन क्यों, कैसे कितना, कब और कहां करना चाहिए। इसका साधना से क्या संबंध है। आपने समझाया कि इंसान का भोजन पशु की तरह होना चाहिए क्योंकि पशु जरूरत के हिसाब से ही खाता है।मंगलवार को जैन विद्या कार्यशाला ‘संबोधि’ के बैनर का अनावरण किया गया।
आज प्रवचन में तेरापंथी सभा, तेयुप, महिला मंडल, कांदिवली, मालाड, सांताक्रुज, गोरेगांव, खार, बांद्रा आदि से श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही। लगभग 200 लोगों ने प्रवचन का लाभ लिया।
कांदिवली तेरापंथ भवन में बह रही है अध्यात्म की गंगा, मुनिवृन्द दे रहे अहिंसा, सत्कर्म व संस्कार का संदेश

