विकास धाकड़/कांदिवली। तप करने वाले पराक्रमी होते हैं,आचार्य महाश्रमण जी के शिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी एवं मुनि श्री मुकुल कुमार जी के सानिध्य में साइन कोलीवाडा से समागत तपस्वी बहिन रेखा जी धाकड़ का तपोभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर मुनि श्री कुलदीप कुमार जी ने कहा कर्म शुद्धि का, मनोबल ,साहस बल और संकल्प बल बढ़ाने का महान पथ है तप। पराक्रमी व्यक्ति ही तप कर सकता है रेखा जी धाकड़ के आज 24 दिनों की तपस्या है और उन्होंने 27 दीनों का प्रत्याख्यान किया है। मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने कहा – विजातीय तत्वों को दूर कर वैचारिक शुद्धि एवं शरीर को साधने का विरलतम उपाय हैं तप। तप की ज्योति के द्वारा आत्मा को आलोकित किया जा सकता है।
इस अवसर पर तेरापंथी सभा कांदिवली के अध्यक्ष ज्ञानचंद जी भंडारी ने तपस्वी बहिन का अभिनंदन किया। महिला मंडल उसकी ओर से प्रीति बोथरा ने तपोनुमोदना की। उल्लेखनीय है यह तपस्विनी बहिन का यह 7 वा मासखमन है। इस अवसर पर परिवार सें नम्रता धाकड ,प्रांजल धाकड़,रजत धाकड़ आदि उपस्थित थे।
कांदिवली में मासखमण तप अनुनोदना

