विकास धाकड़/कांदिवली (मुंबई)। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी स्वामी व मुनि श्री मुकुल कुमार जी के सान्निध्य में दिनांक- 17 अगस्त 2025 को जैन वाङ्मय अचिंत्य प्रभावक “रहस्य” कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यक्रम कि शुरुआत मुनि श्री के नमस्कार महामंत्र से की गई। मंगलाचरण मिनाक्षी जी भुतोड़िया ने किया। स्वागत भाषण श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउण्डेशन अध्यक्ष मेघराज जी धाकड़ ने दिया। मुनि श्री कुलदीप कुमार जी ने अपने वक्तव्य में कहा- जैन धर्म अत्यंत प्रभावक धर्म संस्कृति है। इस संस्कृति में अनेक रहस्य छिपे हुए हैं।
जो रहस्य को जान लेता है। वो जीवन की अनेक समस्याओं का स्वत: समाधान कर लेता हैं। मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने कहा- छिपी एवं गुप्त बात को “रहस्य” कहते हैं। भगवान ऋषभ ने सर्वप्रथम रहस्यवाद की स्थापना की। ऊर्जा हमारे भीतर ही है, रहस्य हमारे सामने ही है, बस जानने की दृष्टि विकसित होनी चाहिए। मुनिश्री ने अनेक रहस्यों की जानकारी देते हुए 2 घंटे के वक्तव्य में सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुनि श्री ने आगमों में निहित मंत्रो द्वारा हमारे जीवन में आने वाली कठिनाईयों को कैसे कम कर सकते हैं, उस बारे में बताया।
मुनि श्री ने भक्तामर स्तोत्र के मूलमंत्र व ऋद्धि मंत्र के रहस्य,नक्षत्र और वृक्ष, उपसर्गहर स्त्रोत के बारे में व अंक शास्त्र में भाग्यांक के बारे में तथा वास्तु शास्त्र की विशिष्ट जानकारी दी। किशोर मंडल ने मुनि श्री से जिज्ञासा समाधान अपने प्रश्नों के द्वारा किया। इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा अध्यक्ष माणक जी धींग, मंत्री दिनेश जी सुतरिया, श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउण्डेशन अध्यक्ष मेघराज जी धाकड़, मंत्री प्यारचंद जी मेहता, कोषाध्यक्ष भगवतीलाल जी धाकड़, दलपत जी बाबेल व सभा संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।
कार्यशाला संयोजक मुकेश जी कुमठ, विनीत जी सिंघवी, विभा जी श्रीश्रीमाल, मधु जी श्यामसुखा का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यशाला में भीलवाड़ा, सूरत, उधना, सचिन, पिताश, भायंदर, दहिसर, बोरीवली, कांदिवली, मलाड, गोरेगांव, मरोल, जोगेश्वरी, खार, सांताक्रुज,विलेपार्ले, चेंबूर, घाटकोपर, मुलुंड, भांडुप,ऐरोली, एलफिंस्टन, अंधेरी, कुर्ला, नालासोपारा, मीरारोड़, बांद्रा क्षेत्र से श्रावकों की उपस्थिति रही। आज की कार्यशाला में 1800 से भी अधिक श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।
कांदिवली में जैन वाङ्मय अचिंत्य प्रभावक कार्यशाला में उमड़ा जनसैलाब

