मुंबई। पूरे भारत में रविवार दिनांक 5 जनवरी 2020 को प्रातः 9:00 से 10:00 एक समय एक साथ एक सामायिक, एकता एवं विश्वमैत्री के संदेश को लेकर इस नव वर्ष की शुरुवात जैन सम्प्रदाय के सभी श्रावक श्राविकाओ ने साथ मे सामायिक करके की और उस सामायिक में जैन धर्म के सबसे बड़े मंत्र नवकार महामंत्र का सामूहिक जप किया।
स्थानिया तेरापंथ युवक परिषद एवं श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस के संयुक्त विद्यमान से औरंगाबाद में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् द्वारा प्रस्तुत जैन सामायिक फेस्टिवल का जैन धर्म के सभी सम्प्रदाय के साथ मिलकर आयोजन किया गया।
औरंगाबाद में इसका चार जगह आयोजन किया गया महावीर भवन कुंभारवाड़ा में परम पूज्य श्रुतमुनिजी मारासाहब एवं शांतिदूत महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी आदि ठाणा 7 के सानिध्य में श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, दशमेश नगर स्थानक में गुलाब मुनिजी मारासाहब के सानिध्य में श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन दक्षिणमध्य श्रावक संघ एवं श्री वर्धमान रेसिडेंसी में वर्धमान रेसिडेंसीय परिवार एवं पंढरपुर स्थानक में श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के समर्थन से किया गया जिसमे सभी जगह मिलाकर लगभग 850 से 900 सामायिक हुई।
इस पावन पल का अभिनंदन करते हुए साध्वी श्री निर्वाणश्री जी ने फरमाया:- समता साधना का सार है और उसका प्रशिक्षण है सामायिक । 12 व्रत में नो व्रत है सामायिक व्रत। हमारे भावी पीढ़ी को सामायिक संस्कृति की विरासत मिले सामायिक के संस्कार का बिजावरोपन किया जाए इसलिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। नमस्कार महामंत्र जो हमें हमारे तीर्थंकरों द्वारा दिया गया है यह मंत्र सभी संप्रदाय से ऊपर उठकर हमें आत्मा को देखने की ओर आगे लेकर जाते हैं दुनिया में ऐसे अनेकों मंत्र है परंतु इसे महामंत्र कहा गया है क्योंकि इसमें जिन आत्माओं को हम नमस्कार करते हैं वह आत्माएं महान है। हमें तो यह मानना चाहिए हमारे हाथ में यह मंत्र कोहिनूर हीरे के समान है ,कल्पवृक्ष के समान है। इस मंत्र में 14 पूर्व की ज्ञान राशि का सार है इसकी महिमा अचिंत है नमस्कार महामंत्र की महिमा बताते हुए साध्वी श्री जी ने बताया यह मंत्र अपने आप में मंगल है तथा सर्व विघ्न बाधाओं को दूर करने वाला है।चाहे हमारे जिंदगी में कितनी भी कठिन समस्या क्यों ना आए उसे काटने का यह एक अमोघ मंत्र है ।ऐसी स्थिति में अगर हम 21 बार उल्टा नमस्कार महामंत्र का जाप करते हैं तो उसका परिणाम हमें स्वत: ही उसी क्षण देखने मिल जाएगा। जैन संप्रदाय के एकता के लिए ऐसे कार्यक्रम होने ही चाहिए।
श्रुतमुनिजी मा. सा. ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा यह आध्यात्मिक संगम एक सुंदर अवसर बन कर हमारे समक्ष आया है। सामायिक आत्म साधना है बाह्य साधना नहीं है। इससे विचारों में, भावो में, वातावरण में परिवर्तन आता है हमें संकल्प करना है कि हम हर रोज एक सामायिक करें। सामायिक की परिभाषा बताते हुए मुनिश्रीजी ने फरमाया
सा का मतलब है साता देना।
मा का मतलब है महान बनो।
ई का मतलब है ईश्वर की भक्ति करो।
क का मतलब है कर्तव्य को जानो।
अपने मधुर भक्ति स्वर में साध्वी वृंद द्वारा’ “कर लो एक सामायिक मिट जाए मन के पाप’ “इस मंत्रमुग्ध करने वाली गीतिका की प्रस्तुति हुई। साध्वी श्री योगक्षेम प्रभा जी ने महामंत्र का महत्व समझाते हुए गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमणजी का अक्षय तृतीया प्रवास इस औरंगाबाद की धरा पर होने वाला है इस अवसर पर सभी संप्रदायों को सजग करते हुए एकता का परिचय देने के लिए आवाहन किया। इस विराट आयोजन को सफल बनाने के लिए औरंगाबाद तेरापंथ युवक परिषद, श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस, श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, श्री दक्षिणमध्य श्रावक संघ, वर्धमान रेसिडेंसीय परिवार एवं श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंढरपुर के सभी उपरोक्त संस्थाओ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओ ने परिश्रम लिया।
जैन सामायिक फेस्टिवल को पूरे जैन समाज का उत्सपूर्ण प्रतिसाथ

