फिल्म संत तुकाराम देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म को दर्शकों की ओर से इसके शिल्प, अभिनय, भव्यता, दृष्टिकोण को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। जहां एक बड़ा वर्ग फिल्म की सराहना कर रहा है, वहीं एक समूह ऐसा भी है जो इस फिल्म का विरोध कर रहा है।
पुणे में एक समूह द्वारा विवाद का मामला सामने आया है, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म के निर्देशक आदित्य ओएम ने कहा, “पुणे शहर में संत तुकाराम फिल्म के अधिकांश शो बाधित कर दिए गए हैं। यह व्यवधान संत तुकाराम संस्थान द्वारा उठाई गई आपत्तियों के चलते हुआ, जिसके बाद पुणे पुलिस ने एक परामर्शी (एडवाइजरी) जारी की है।” इस पर आगे बोलते हुए आदित्य ओम ने कहा “पुलिस की परामर्शी में कहा गया है कि संत तुकाराम संस्थान द्वारा उठाई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, पुणे शहर के सिनेमाघरों को सतर्क किया गया है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए उपयुक्त कदम उठाने को कहा गया है। फलस्वरूप, अधिकांश सिनेमाघरों ने फिल्म के शो रद्द कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को बिना किसी कट के ‘U’ सर्टिफिकेट प्रदान किया है। इस पूरे घटनाक्रम का फिल्म की स्क्रीनिंग पर सीधा असर पड़ा है, जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।”
फिल्म के लेखक व निर्देशक का कहना है कि संत तुकाराम को पूर्ण भक्ति भाव और एकमात्र उद्देश्य के साथ बनाया गया है। संत तुकाराम महाराज के मूल्यों, आदर्शों और शिक्षाओं को पूरे राष्ट्र में फैलाना। फिल्म समीक्षकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि फिल्म को अत्यंत श्रद्धा और समर्पण के साथ बनाया गया है।
संत तुकाराम 18 जुलाई को रिलीज़ हुई थी और वर्तमान में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। 17वीं सदी के संत-कवि को, जिनकी भक्ति रचनाएं आध्यात्मिकता और प्रतिरोध का नया स्वरूप बनीं। फिल्म तुकाराम के जीवन-संघर्ष को चित्रित करती है। एक शोकग्रस्त पति से लेकर शोषितों की आवाज़ बन चुके कवि तक की उनकी यात्रा, जिसे उन्होंने अपने आत्मा से निकले ‘अभंग’ के माध्यम से व्यक्त किया।
फिल्म में सुबोध भावे, अरुण गोविल, शिशिर शर्मा, संजय मिश्रा, शिवा सूर्यवंशी, शीना चौहान, हेमंत पांडे, गणेश यादव, ललित तिवारी, मुकेश भट्ट, गौरी शंकर, ट्विंकल कपूर, रुपाली जाधव और डीजे अकबर सामी आदि ने अभिनय किया है।
फिल्म का संगीत निखिल कामत, रवि त्रिपाठी, वीरल और लावण ने रचा है, जो ‘अभंग’ परंपरा से प्रेरित है और जिसमें शास्त्रीय और लोक संगीत की समृद्ध झलक मिलती है।
“हमने यह फ़िल्म सम्पूर्ण भक्ति भाव से बनाई है”, संत तुकाराम पर हो रहे विवाद पर बोले निर्देशक आदित्य ओम

