मुंबई: शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सुरक्षा बल के पांच जवानों का बदला लेने के लिए बिना हो-हल्ला मचाए सर्जिकल स्ट्राइक किया जाना चाहिए। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि बहादुर सैनिक अपनी ही धरती पर शहीद हो गए और यह वैसे समय में हुआ जब केंद्र में मजबूत सरकार है। सामना में लिखा गया, ‘देश कोविड-19 की वजह से उपजी जंग जैसी स्थिति से ‘कश्मीर वॉर’ को भूल गया, लेकिन पाकिस्तान नहीं भूल पाया।’
कश्मीर में शहीद हुए इन लोगों पर भी होनी चाहिए फूलों की बारिश
शिवसेना ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ संघर्ष कर रहे पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और नर्सों की प्रशंसा किया जाना बरकरार रहेगा, लेकिन कश्मीर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बिना किसी पार्टी या सरकार का नाम लिए शिवसेना ने कहा कि हंदवाड़ा मुठभेड़ में शहीद हुए इन जवानों के परिवारों पर भी फूल बरसाए जाने चाहिए थे।
कश्मीर में नहीं बंद हो रही घुसपैठ
मुखपत्र में कहा गया, “पिछले साल अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद से कश्मीर में बंद है और इसके बाद भी घुसपैठिए हमले कर रहे हैं।” शिवसेना ने कहा कि यह स्वीकार किए जाने की जरूरत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत इच्छाशक्ति की वजह से अनुच्छेद हटा, लेकिन वहां भारतीय जवानों का शहीद होना जारी है।
देश में नहीं होनी चाहिए हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर राजनीति
‘सामना’ में कहा गया है कि देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी देने वाले जवानों में एक मुस्लिम जवान भी था, इसलिए जो भी हिंदू-मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए। उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा क्षेत्र में दो दिन पहले आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में सेना के एक कर्नल और एक मेजर समेत सुरक्षा बल के पांच जवान आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। शहीद हुए जवानों में 21 राष्ट्रीय रायफल के कमांडिंग अधिकारी कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश और लांस नायक दिनेश तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस के उप निरीक्षक शकील काजी शामिल हैं। शिवसेना ने कहा कि कर्नल शर्मा की बेटी ने एक मई को अपना जन्मदिन मनाया था और शर्मा देश की रक्षा करते हुए तीन मई को शहीद हो गए।

