नई दिल्ली: ‘राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करने में क्या चुनाव आयोग शक्तिहीन है? आखिर राजनीतिक दलों की आय और खर्च के ब्योरे को लेकर दिए गए हाई कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।’ यह तल्ख टिप्पणी मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने की है। पीठ ने निर्वाचन आयोग की जमकर खिंचाई भी की।
राजनीतिक दलों की आय व खर्च को लेकर गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह खर्च की जानकारी देने के संबंध में लगातार राजनीतिक पार्टियों को पत्र लिख रहे हैं।
पीठ ने इस जवाब पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आपने पत्र लिखा और उन्होंने जवाब नहीं दिया? अब आगे क्या? अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो आप अदालत को बताइए अब आप क्या करने जा रहे हैं ? आपके पास क्या अधिकार हैं? आपका जवाब आपकी तरफ से शक्तिहीनता दिखा रहा है।
पीठ ने निर्वाचन आयोग को शपथ-पत्र दायर कर यह बताने के लिए कहा कि कार्रवाई के लिए आयोग के पास क्या अधिकार हैं। याचिकाकर्ता के वकील अर¨वद निगम व अभिमन्यु श्रेष्ठ ने कहा कि राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्वाचन आयोग के पास पर्याप्त अधिकार हैं।

