बस्ती ब्यूरो। पिछले दिनों वाल्टरगंज थानन्तर्गत सुकरौली के पास दिन दहाड़े गोली मारकर हुई बसपा नेता रामराज उर्फ गम्मज हत्याकांड को लेकर एक और खुलासा हुआ है। जानकारी ने अनुसार, हत्यारोपी की जिस जनेऊ को तोड़ने का आरोप ब्राह्मण समाज द्वारा पुलिस पर लगाया जा रहा है उसे 2015 में खुद हत्यारोपी कृष्णकुमार तिवारी उर्फ झिनकान तिवारी ने निकालकर हरदी चौराहा स्थित बरगद के पेड़ पर लटकाते हुए कसम खायी थी कि जब तक गम्मज को मार नहीं डालता तब तक जनेऊ नहीं पहनूंगा। और उसने हत्या को अंजाम भी दे दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब उसने जनेऊ पहना ही नहीं था तो पुलिस पर उसे तोड़ने का आरोप क्यों लगाया जा रहा है। क्या ब्राह्मण अस्मिता के नाम पर आरोपियों को बचाने के लिये झूठ फैलाने का प्रयास किया जा रहा है?

उल्लेखनीय है कि इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें चल रही है साथ ही क्षेत्र के सांसद, विधयाक ने पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की और ब्राह्मण समाज के कुछ नेताओं व सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग हत्यारोपी परिवार से मिलकर उनके पक्ष में आंदोलन करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या आरोपी के परिवार द्वारा लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है या लोग जान बूझकर ऐसा कर रहे हैं? इस बात का पता तो जांच के बाद ही चल पायेगा।

मृतक बसपा नेता गम्मज के छोटे भाई व जिला पंचायत सदस्य दीपिका गौतम के पिता चंद्रप्रकाश ने संवाददाता को एक पत्र में घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 21 जुलाई 2015 को दोपहर करीब साढ़े 4 बजे हमारे दिवंगत भाई रामराज उर्फ गम्मज व आरोपी झिनकान तिवारी पुत्र किशोर तिवारी, अशोक तिवारी पुत्र राममिलन तिवारी, मुकेश तिवारी, मनीष तिवारी के बीच हमारे हरदी स्थित घर के सामने मजार के पास झगड़ा हुआ था, उसी दिन झिनकान तिवारी हरदी चौराहे पर आकर राममिलन पाठक के घर के पास स्थित बरगद के पेड़ पर अपना जनेऊ उतारकर कसम खायी थी कि जब तक रामराज को मार नहीं डालूंगा, तब तक जनेऊ नहीं पहनूंगा। उस दिन हरदी चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों के साथ ही कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि झिनकान ने जब जनेऊ पहना ही नहीं था तो हमारे जनप्रतिनिधि, ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि किस जनेऊ की बात कर रहे हैं, जो पुलिस ने तोड़ दिया?
बताते चलें कि सोशल मीडिया पर हत्यारोपियों के पक्ष में काफी लोग सक्रिय होकर अभियान चला रहे हैं, जो दिन दहाड़े हुई इस हत्या को अंजाम देने वालों के पक्ष में आंदोलन तक की धमकी दे रहे हैं जबकि हत्या दिन दहाड़े हुई और उसकी चश्मदीद खुद मृतक बसपा नेता रामराज उर्फ गम्मज की पत्नी हैं। बावजूद इसके सोशल मीडिया के जरिये पुलिस द्वारा जनेऊ तोड़ने तथा ब्राह्मण की अस्मिता की बात करके लोगों को भड़काया जा रहा है, जिससे न्यायालय में पहुंच चुके मामले को प्रभावित किया जा सके। हालांकि मामले की असलियत क्या है, यह जांच का विषय है लेकिन क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द न बिगड़े इसे लेकर पुलिस को कोई कदम जरूर उठाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सोमवार 28 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव इंटहिया निवासी झिनकान तिवारी, अशोक तिवारी के साथ सिकटा निवासी उमेश शुक्ला ने पीछे से पल्सर से आकर ताबड़तोड़ पांच गोलियां चलाई थी, जिसमें रामराज बुरी तरह से घायल हो गए थे। इस हमले में उन्हें तीन गोलियां लगी थी। गोली लगने के बाद आनन-फानन में उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गयी थी।

