नई दिल्ली: अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिक धन खर्च करना पड़ेगा। गृह मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यदि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अपने राज्यों में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती चाहते हैं तो उन्हें पहले के मुकाबले इन बलों पर 10% से 15% अधिक खर्च करना होगा। ऐसे में राज्यों का वर्तमान खर्च बढ़कर 2023 से 65% हो जाएगा।
बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश में यह नियम लागू नहीं होगा
मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2019-20 में सामान्य इलाकों में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए राज्यों ने 13.70 करोड़ रु. दिया था जो वर्ष 2023-24 में यह खर्च बढ़कर 22.30 करोड़ रु. तक पहुंच जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, जिन केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा नहीं है उन राज्यों को इस फैसले से छूट दी गई है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सीएपीएफ/आरएएफ के जवानों को तैनाती के बाद उनके लिए उपयुक्त और बेहतर ठहरने की व्यवस्था और अन्य सुविधाएं जैसे पानी, बिजली आदि के लिए आनेवाला खर्च वहन करना होगा।
मंत्रालय के मुताबिक, अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में राज्यों ने वर्ष 2019-20 में 25.18 करोड़ रु. खर्च किए थे जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 33.78 करोड़ रु. हो जाएगा। यदि अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की अवधि 10 दिन आगे बढ़ाई जाएगी तो राज्यों को पूरे महीने का खर्च वहन करना पड़ेगा। इसमें केंद्र सरकार द्वारा खर्च का वहन का कोई प्रावधान नहीं है।”
मंत्रालय ने पत्र में कहा, “यदि 10 दिनों से कम या उनके स्थाई मुख्यालय के जिलों में तैनाती की जाती थी तो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीएपीएफ/आरएएफ की तैनाती पर केंद्र राज्यों से खर्च नहीं लिया जाएगा। लेकिन 10 दिनों की अवधि से आगे विस्तार किए जाने पर राज्यों को पूरी अवधि के लिए खर्च वहन करना होगा।”

