जंगलीः 3 स्टार,
कलाकारः विद्युत जामवल, पूजा सामंत, आशा भट्ट, अतुल कुलकर्णी, मकरंद देशपांडे
निर्देशकः चक रुसैल
विद्युत जामवल की ‘जंगली’ रिलीज हो गई। फिल्म में इमोशन है, हाथियों को बचाने का संदेश और विद्युत जामवल का बेहतरीन एक्शन भी है। अगर फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो एक बार जरूर देखें। कुल मिलाकर ‘जंगली’ एक्शन, इमोशन और ड्रामा का भरपूर संगम है लेकिन इसमें कई चीजें अप्रत्याशित और स्टोरी में कुछ नया न होने की वजह से थोड़ा निराश करती है।
कहानीः केरल के जंगलों में हाथियों पर संकट की कहानी है। जिसमें विद्युत जमावल (राज) जानवरों का डाक्टर होता है, वह शहर में अपना अस्पताल चलाता है तथा उसके पिता हाथियों के संरक्षण के लिए काम करते हैं। जंगल के पास उनका घर है यहीं से वे हाथियों का ख्याल रखते हैं और सेंचुरी चलाते हैं। उनका साथ दे रहे होती है महिला महावत पूजा सामंत (शंकरा)। राज की मां की कैंसर से मौत हो जाती है जिसके बाद वह घर छोड़कर चला जाता है, क्योंकि उसे लगता है कि उसके पिता ने अगर शहर जाकर इलाज करवाया होता तो वह जिंदा होती। इसीलिए वह घर नहीं आना चाहता लेकिन काफी कोशिशों के बाद वह 10 साल बाद मां की दसवीं पुण्यतिथि पर घर लौटता है और अपने दोस्त शंकरा, भोला (हाथी) व अन्य हाथियों व आस-पास को लोगों के बीच पहुंचकर काफी खुश होता है। उसके साथ ही महिला पत्रकार मीरा (आशा भट्ट) भी राज का पीछा करते हुए उसके पिता व सेंचुरी पर स्टोरी करने के लिए वहां पहुंच जाती है। साथ ही हाथी दांत के लिए हाथियों के शिकारी भी वहां आ धमकते हैं। फिल्म में जंगल की खूबसूरती के साथ ही हाथियों और इंसानों के बीच के प्यार को अच्छे से परदे पर दिखाया गया है। इस दौरान कई भावुक पल, कई एक्शन और ड्रामे के साथ फिल्म में बताया जाता है कि हर 15 मिनट पर एक हाथी का शिकार होता है। यदि लोग हाथी दांत की बनी चीजें प्रयोग करना छोड़ दें तो इसे रोका जा सकता है। साथ ही फिल्म में यह भी संदेश है कि जानवर को भी अगर हम इंसान प्यार करें तो वे कभी भी हमें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। बाकी की चीजें देखने के लिए एक बार थिएटर जरूर जाएं वह भी सपरिवार।
एक्टिंगः फिल्म में विद्युत जामवल खूब जमे हैं, जबरदस्त एक्शन का प्रदर्शन किया है। हालांकि एक्टिंग के लिए कुछ खास नहीं था, फिर भी वे एकदम नेचुरल दिखे हैं। महिला महावत शंकरा के किरदार में पूजा सामंत खूबसूरत लगी हैं और पत्रकार के रूप में आशा भट्ट की एक्टिंग भी अच्छी रही। दोनों ही खूबसूरत लगी हैं। हाथियों के शिकारी के किरदार को अतुल कुलकर्णी ने अच्छा निभाया है। मकरंद देशपांडे भी बढ़िया दिखे। बाकी के लोग भी अपने हिस्से को अच्छे से निर्वहन किया है।
निर्देशनः चक रुसैल का निर्देशन उतना प्रभावी नहीं हो पाया जितना हो सकता था। हालांकि फिल्म लोकेशंस ही फिल्म की जान हैं। कुछ अनवांटेड सीन भी फिल्म में दिखते हैं जो दर्शकों को हैरान कर सकते हैं।
संगीतः फिल्म में तीन गाने हैं ‘गरजे गरजे’ , ‘फकीरा घर आजा’ और ‘साथी’। समीर उद्दीन का संगीत सामान्य कह कहते सकते हैं।
- दिनेश कुमार/dinesh@surabhisaloni.com

