इस्लामाबाद:आतंकवाद का निर्यातक देश पाकिस्तान दुनिया की आंख में धूल झोंकने से बाज नहीं आ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दिखावा करके एफएटीएफ की काली सूची से बचने की कोशिश में जुटा पाकिस्तान दहशतगर्दों पर कार्रवाई की बजाय उनका नाम सूची से हटा रहा है। पाकिस्तान ने निगरानी सूची से हजारों आतंकवादियों का नाम हटा दिया है। वह कहावत आपने सुनी है ना? नाखून कटा शहीद कहलाना। पाकिस्तान तो नाखून भी नहीं कटाना चाहता नाम काट रहा है।
यह लिस्ट पाकिस्तान के नेशनल काउंटर टेरेरिज्म अथॉरिटी (NACTA) द्वारा तैयार की जाती है। इसका मकसद वित्तीय संस्थानों को यह बताना भी होता है कि सूची में मौजूद लोगों के साथ कारोबार या लेनदेन ना करें। वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 2018 में इस लिस्ट में करीब 7,600 नाम थे। पिछले 18 महीनों में इनकी संख्या घटकर 3,800 रह गई है। मार्च के बाद से अब तक 1,800 नाम हटाए जा चुके हैं।
कई खूंखार वैश्विक आतंकियों के नाम भी हटाए
लिस्ट से जिन आतंकवादियों के नाम हटाए गए हैं उनमें से कई के नाम अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादियों और प्रतिबंधित सूचियों में शामिल है। कइयों की पहचान डेट ऑफ बर्थ, आईडी नंबर आदि नहीं होने की वजह से नहीं हो पा रही है।
ग्रे लिस्ट में है पाकिस्तान, ब्लैक सूची में डाले जाने का खतरा
सूची से नामों को हटाए जाने को लेकर कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। पाकिस्तान पर लंबे समय से आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का वैश्विक दबाव है। उस पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में डाले जाने की तलवार लटक रही है, पहले से ही ग्रे लिस्ट में मौजूद है। कई बार उसे उसके सदाबहार दोस्त चीन ने बचा लिया है, लेकिन अब उसने आतंकवादियों का नाम सूची से हटाकर धूल झोंकने की कोशिश की है।
यह दी दलील
इस मुद्दे पर पाकिस्तान में आंतरिक मामलों के एक अधिकारी ताहिर अकबर ने कहा कि यह सूची कई खामियों की वजह से लंबी थी। इसमें कई ऐसे लोगों के नाम थे जिनकी मौत हो चुकी है या उन लोगों के नाम भी शामिल हो गए थे जिन्होंने अपराध तो किया है, लेकिन आतंकवादी समूह से नहीं जुड़े हुए थे।
जून में हो सकता है फैसला
एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर टेरेरिज्म फाइनेंसिंग पॉलिसीज पर नजर रखने वाली पेरिस बेस्ड निगरानी संस्था एफएटीएफ पाकिस्तान के प्रदर्शन पर जून में फिर विचार करने जा रही है। जून 2018 से ही एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर कड़ी नजर रखी है। यदि पाकिस्तान एक्शन प्लान पर संतोषजनक काम नहीं करता है तो एफएटीएफ सदस्य इसके खिलाफ वोट करके अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से दूर कर सकते हैं।

