नई दिल्ली:ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर लगी पाबंदी से भारत को मिली छूट दो मई से खत्म हो गई है। ऐसे में भारत ने खाड़ी में तेल के बड़े उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक और यूएई से आपूर्ति बढ़ाने का संकेत दिया है, ताकि आपूर्ति में कमी से कीमतों में कोई उछाल न आए। विश्लेषकों का कहना है कि अब सबकी नजर ओपेक की अगुवाई करने वाले और ईरान के धुरविरोधी देश सऊदी अरब पर होगी। अगर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश तेल आपूर्ति बढ़ाते हैं तो ही कीमतें स्थिर रह पाएंगे, वरना इसमें तेजी से उछाल आने की आशंका है।
सऊदी अरब वैसे भारत को सबसे ज्यादा तेल आपूर्ति करता रहा है, लेकिन 2017-18 में इराक ने उसे पीछे धकेल दिया। अमेरिका ने ईरान पर परमाणु समझौते को तोड़ने का आरोप लगाते हुए चार नवंबर ईरान पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इससे ईरान से कच्चे तेल की खरीद करने वाले देश भी इसकी जद में आ गए। हालांकि तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया समेत आठ देशों को छह माह तक तेल खरीद जारी रखने की छूट दे दी थी, लेकिन इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
तेल सौ डॉलर पहुंचा तो आप पर ये असर होगा
विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत, चीन और जापान जैसे बड़े खरीदारों को ईरान से आपूर्ति बंद होने के बाद अगर दूसरे देश आपूर्ति नहीं बढ़ाते हैं तो कच्चा तेल सौ डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे भारत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा।
1. महंगाई बढ़ेगी तो आपकी जेब हल्की होगी
भारत, चीन, जापान और यूरोप के तमाम देशों की अर्थव्यवस्था तेल आयात पर निर्भर है। दाम बढ़े तो जीडीपी पर असर होगा और पेट्रोल-डीजल समेत सभी वस्तुओं व सेवाओं की महंगाई भी तेजी से बढ़ेगी। हमारी आपकी जेब भी हल्की हो जाएगी।
2. रुपया नीचे आने से आयात महंगा होगा
तेल सौ डॉलर पहुंचता है तो रुपया तेजी से लुढ़क सकता है, जिससे भारत को आयात के बदले ज्यादा पूंजी चुकानी होगी और शेयर बाजार भी नीचे आने की आशंका है। हालांकि डॉलर में मजबूती से निर्यात में लाभ होगा।
3. व्यापार घाटा बढ़ेगा
भारत जैसे देशों का व्यापार घाटा, राजकोषीय घाटा तेजी से बढ़ेगा और मुद्राएं नीचे आएंगी। इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाने को मजबूर होंगे। ब्याज दर बढ़ने से होम, पर्सनल, ऑटो लोन और उद्योगों के लिए लागत बढ़ेगी।
4. विकास दर पर असर पड़ेगा
अगर कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योग विनिर्माण या उत्पादन में कमी लाते हैं या उत्पादों के दाम बढ़ाते हैं तो उपभोक्ता को झटका लगेगा। अगर उपभोक्ता कम खर्च करते हैं तो इसका असर उत्पादों व सेवाओं की बिक्री पर पड़ेगा, जिससे विकास दर नीचे आ सकती है।
5. पूरी दुनिया को झटका लगेगा
भारत ही नहीं पूरी दुनिया में विकास दर इससे घट सकती है, जो अमेरिका-चीन में व्यापार युद्ध जैसे कारणों से पहले ही दबाव में है। पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने से यूरोप और अमेरिका जैसे देशों से भारत को निर्यात ऑर्डर में कमी आ सकती है।
इराक से सबसे ज्यादा आपूर्ति
20 फीसदी से ज्यादा खरीद कच्चे तेल की इराक से
देश : 2017-18 : 2018-19
इराक : 4.57 करोड़ टन : 4.66 करोड़ टन
सऊदी : 3.61 करोड़ टन : 4.03 करोड़ टन
ईरान : 2.25 करोड़ टन : 2.39 करोड़ टन
यूएई : 1.42 करोड़ टन : 1.75 करोड़ टन
वेनेजुएला : 1.83 करोड़ टन : 1.73 करोड़ टन
नाइजीरिया : 1.81 करोड़ टन : 1.68 करोड़ टन
कुवैत : 1.1 करोड़ टन : 1.07 करोड़ टन
मैक्सिको : 0.99 करोड़ टन : 1.02 करोड़ टन
(अप्रैल 2018 से मार्च 2019 के आंकड़े, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कामर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स)
जो कोई भी तेल को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, वह ओपेक को खत्म करने की साजिश रच रहा है और उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे। इससे तेल उत्पादक देशों के संगठन ध्वस्त हो जाएगा। (बिजान जंगानेह, ईरान के तेल मंत्री)
अमेरिका से आपूर्ति चार गुना बढ़ी
अमेरिका ने तेल की बिक्री वर्ष 2017 में शुरू की थी और दो साल में ही उसकी भारत को तेल की बिक्री चार गुना बढ़कर वर्ष 2018-19 में 64 लाख टन पहुंच गई है। जबकि वर्ष 2017-18 में उसने सिर्फ 14 लाख टन कच्चे तेल को भारत भेजा था।
ईरान से तेजी से घटा कारोबार
ईरान वर्ष 2010-11 तक भारत को तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण वह एक समय सातवें स्थान पर लुढ़क गया। वर्ष 2013-14 और 2014-15 में भारत ने करीब 1.1 करोड़ टन तेल ही ईरान से खरीदा। लेकिन ओबामा के कार्यकाल में प्रतिबंध हटने के बाद यह आपूर्ति 2015-16 में 1.27 करोड़ टन पहुंच गई और वह छठवें स्थान पर आ गया। वहीं 2016-17 में भारत को 2.72 करोड़ टन तेल बेचकर वह तीसरे स्थान पर आ गया।
ईरान का तेल अहम क्यों
ईरान तेल खरीद पर देता है अतिरिक्त छूट
भारतीय रिफायनरी के लिए ज्यादा उपयुक्त है
भुगतान के लिए ज्यादा समय देता है ईरान
रुपये में भी कुछ भुगतान स्वीकार करता है
आशंका
100 डॉलर प्रति बैरल हो सकता है कच्चा तेल, अभी 72 डॉलर
80 फीसदी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है भारत
10 फीसदी आपूर्ति करीब ईरान से हो रही थी भारत की
33 फीसदी बढ़ चुके हैं तेल के दाम इस साल, छह माह का उच्चतम स्तर
08 लाख बैरल की कमी होगी ईरान की आपूर्ति बंद होने से

