मुंबई। महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी की प्रबुद्ध सुशिष्या शासन श्री साध्वी कंचनप्रभाजी ने “छूए ज्ञान सम्पदा के रहस्यों को” कार्यशाला में प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि हमारी आत्मा में विशाल ज्ञान राशि का भंडार है । द्रव्य क्षेत्र की भूमिका के अनुसार कभी ज्ञान विकसित होता है तो, कभी ज्ञान अज्ञान में परिणित हो जाता है । उसमे क्रोध आदि कषाय भी निमित्त बनते हैं ।
हमारी ऐसी साधना हो कि ऋजुता, मृदुता की साधना से ज्ञान की ऊंचाई तक पहुंचे और आत्माका ऊर्ध्वरोहण करें। केवल ज्ञान प्राप्त हो जाए तो सब कुछ प्राप्त हो जाता है शासन श्री साध्वी मंजुरेखाजी ने कहा जब तक सही दिशा प्राप्त नहीं होती तब तक मनुष्य जन्म की सार्थकता समझ नहीं आती । वर्तमान जीवन शैली में जो अघटीत घटनाएं घटित हो रही है उसमें अज्ञान की भूमिका ही होती है। आप सब को यही समझना है कि हमारी ऊर्जा संयम के परमाणुओं से परिष्कृत व पुष्ट हो, उससे हम अपनी मंजिल को प्राप्त कर दिखलाएं कि व्यक्तित्व और विचार क्या होते हैं। मति ज्ञान श्रुत ज्ञान के आधार पर नई पीढी का निर्माण करे।
फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंदनमल धाकड़, कार्याध्यक्ष गणपतलाल डागलिया,सभा के उपाध्यक्ष दिनेश धाकड़ तेयुप के अध्यक्ष सुमीत सुराणा कोषाध्यक्ष रोनक धाकड़ महिला मंडल अध्यक्ष लतिका डागलिया आदि उपस्थित थे यह जानकारी सभा के मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ ने दी।
दोडती जिन्दगी में आधार बने ज्ञान “छूए ज्ञान सम्पदा के रहस्यों को “

