मुम्बई। दक्षिण मुंबई कालबादेवी महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल के प्रांगण में जन मेदिनी को संबोधित करते हुए शासन श्री साध्वी कैलाशवति जी ने कहा-पर्युषण महापर्व हमारे भीतर अंधकार को मिटाकर आलोक भी खेलता है। पर्यूषण पर्व आध्यात्मिकता से ओतप्रोत है। संवत्सरी महापर्व को मनाने से पूर्व आठ दिन त्याग ,तपस्या व जप से आत्मा रूपी धरा को पवित्र व शुद्ध बनाया जाता है। फिर इस स्वच्छ मंदिर में संवत्सरी रूपी वीतराग देव को स्थापित किया जाता है।
पर्युषण पर्व प्रथम दिन खाद्य सीमा से खाद्य संयम दिवस आराधना की जाती है। और आज हम सुन रहे हैं स्वाध्यिय दिवस की आराधना करनी चाहिए। स्वाध्याय हमारे विचारों को फिल्टर करता है। भगवान महावीर के सताईस भवों का वाचन करते हुए साध्वी श्री जी ने आगे फरमाया नयसार संतो को रास्ता बताया तो संतो ने कहा नयसार हम आपको संसार से तरने का रास्ता बताते हैं, जो व्यक्ति संयम व क्षमता से जीवन जीता है वह सम्यक्त्व को प्राप्त होता है नयसार के भव से भगवान महावीर के जीव ने सम्यक्त्व ग्रहण की यही से भगवान महावीर की आत्मा मोक्ष रूपी नगरी की ओर प्रस्थान करती है जीव 84 लाख में भ्रमण करते करते मनुष्य जन्म अनमोल पाता है दूसरे भव में मरीचि के रूप में भगवान महावीर की आत्मा भ्रमण करती है उसी भव में वह भगवान ऋषभ के पास दीक्षा ग्रहण करता है।
दीक्षा पश्चात मरीचि मुनि ने ग्यारहअंगों का अध्ययन किया और तपस्या में जीवन लगा दिया। चंदनबाला के तेले की प्रेरणा देते हुए कहा शक्ति को नहीं छुपाये। अपनी शक्ति अनुसार तपस्या के प्रांगण में स्वयं को खड़ा करें ।आज के प्रोग्राम का मंगलाचरण किया दक्षिण मुंबई तेरापंथ युवक परिषद ने।
साध्वी पंकज श्री जी ने स्वाध्याय का अर्थ बताते हुए कहा स्व + अध्याय अर्थात स्वयं को देखना ,स्वयं का अध्ययन करना, स्वयं को पढ़ना ही स्वाध्याय है। स्वाध्याय आंशिकतप, है यह तो लाइट है। जिससे व्यक्ति को देखता है अच्छी पुस्तकें पढ़ने से जीवन में संयम व सादगी का उर्ध्वारोहण होता है। स्वाध्याय के पांच प्रकार है- वाचना – सत् साहित्य का वाचन करना। प्रच्छना -ज्ञानवर्धि के लिए जिज्ञासा करना, परिवर्तना- बार-बार दोहराना। अनुप्रेक्षा- अनु चिंतन करना। धर्म विधा धार्मिक विषयों पर चर्चा करना। स्वाध्याय संजीव अनंत कर्मो को सीण करता है। खाद्य संयम पर विचार रखे साध्वी ललिता श्री एवं साध्वी सम्यक्तव यशा में जी ने साध्वी पंकज श्री जी ने गोरखधंधे में ही सारो टाइम लागे साधु संतों का उणिहारो प्यारो प्यारो प्यारो लागे गितिका के माध्यम से जनता को धर्म करने का उपदेश दिया।
दक्षिण मुम्बई में “खाद्य संयम, स्वाध्याय दिवस” का शानदार आयोजन

