बेंगलुरु। धर्मनगरी विजयनगर, बेंगलुरु की पुण्य धरा पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ ट्रस्ट (रजि.), विजयनगर के तत्वावधान में प्रवचन-प्रभाविका, प्रतिभापुंज डॉ. साध्वी रत्ना श्री सुमंगलप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा-5 का शुभ मंगलमय चातुर्मास प्रवेश समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर बेंगलुरु सहित विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा संपूर्ण विजयनगर क्षेत्र धर्ममय वातावरण से गुंजायमान हो उठा।
इस वर्ष प्रथम बार डॉ. साध्वी रत्ना श्री सुमंगलप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा-5 का चातुर्मास विजयनगर में हो रहा है। चातुर्मास प्रवेश के लिए प्रातः 8.01 बजे श्रीमान् आनन्दकुमारजी नाहर परिवार के निवास स्थान से भव्य जुलूस प्रारंभ हुआ, जो श्रद्धालुओं की जयघोष, मंगलगान एवं धर्ममय वातावरण के बीच प्रातः 8.31 बजे विजयनगर स्थानक भवन पहुंचा, जहां साध्वी श्री का शुभ मंगल प्रवेश हुआ। साध्वी श्री के साथ ज्ञान साधिका, मधुर व्याख्यानी साध्वी रत्ना डॉ. श्री सुवृद्धिश्रीजी म.सा., अध्ययनशीला साध्वी रत्ना श्री रजतप्रभाजी म.सा., मधुर गायिका साध्वी रत्ना श्री प्रांजल श्रीजी म.सा. तथा स्वाध्याय प्रेमी साध्वी रत्ना श्री वंदना श्रीजी म.सा. का मंगलमय सान्निध्य भी समाज को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री के मंगलाचरण से हुआ। तत्पश्चात पूज्य उपप्रवर्तिनी गुरुणी डॉ. साध्वीरत्ना श्री सुमंगलप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा-5 ने अपने मंगल प्रवचन में धर्म को गंगा के समान बताते हुए कहा कि धर्मरूपी गंगा स्वयं चलकर श्रद्धालुओं के द्वार तक पहुंची है, अब उसमें डुबकी लगाकर धर्म आराधना का लाभ उठाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समय का महत्व समझता है, वही जीवन में महान बनता है। प्रभु की करुणा से प्राप्त चातुर्मास के चार अमूल्य महीनों में आत्मचिंतन, स्वाध्याय, तप, संयम, कषायों का त्याग एवं लक्ष्यपूर्ण धर्म आराधना कर जीवन को मंगलमय बनाना ही चातुर्मास की वास्तविक सार्थकता है। साध्वी श्री ने सभी श्रद्धालुओं से विवेक जागृत कर आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होने तथा चातुर्मास का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। प्रवेश के पश्चात आयोजित धर्मसभा में साध्वीवृंद ने वर्षावास की महत्ता, आत्मशुद्धि, संयम, सदाचार, स्वाध्याय एवं धर्म साधना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए चातुर्मास को आत्मचिंतन और आत्मोन्नति का सर्वोत्तम अवसर बताया। चातुर्मास समिति के चेयरमैन वसन्तकुमार रांका एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष रतनलाल सुराणा ने सभी आगंतुक संघों, अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर वसन्तकुमार रांका ने कहा कि विजयनगर संघ के लिए यह अत्यंत सौभाग्य एवं गौरव का विषय है कि प्रथम बार पूज्य साध्वी श्री का चातुर्मास यहां संपन्न हो रहा है। उन्होंने सभी से चार माह तक नियमित धर्म आराधना, साधु-साध्वी सेवा तथा विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता निभाकर चातुर्मास का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर विजयनगर के विधायक एम. कृष्णप्पा भी उपस्थित रहे। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ ट्रस्ट, विजयनगर द्वारा उनका सम्मान किया गया। सम्मान के पश्चात ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उनसे अपने विचार व्यक्त करने का आग्रह किया। इस पर विधायक एम. कृष्णप्पा ने विनम्रता से कहा कि, “मैं आज यहां बोलने नहीं, बल्कि सुनने और धर्मलाभ लेने आया हूं।” उनके इस विनम्र भाव ने सभी उपस्थितजनों का मन जीत लिया तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने उनके इस बड़प्पन की सराहना की। चातुर्मास प्रवेश समारोह में बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न नगरों एवं अनेक संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों ने साध्वी श्री के श्रीचरणों में उपस्थित होकर चातुर्मास की विनती की अर्ज प्रस्तुत की तथा धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर, ध्यानयोगी, आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिव मुनिजी म.सा. तथा श्रमण संघीय प्रथम युवाचार्य पूज्य गुरुदेव श्री मिश्रीमलजी म.सा. के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करते हुए उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्मरण किया गया। इस अवसर पर कन्या मंडल द्वारा धर्म जीवन के छह चरणों पर आधारित प्रेरक नाटिका की अत्यंत सुंदर एवं प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई, जिसे उपस्थित समाजजनों ने भावविभोर होकर सराहा।इस अवसर पर कन्हैयालाल सुराणा ने भीलवाड़ा में विराजित युवाचार्य भगवान का मंगल संदेश पढ़कर सुनाया तथा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय मंत्री के रूप में समस्त चातुर्मासों की मंगलकामनाएं साध्वी श्री के श्रीचरणों में समर्पित कीं।
समारोह के सफल आयोजन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ ट्रस्ट (रजि.), विजयनगर, बेंगलुरु के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चातुर्मास समिति के चेयरमैन वसन्तकुमार रांका के नेतृत्व में ट्रस्ट के अध्यक्ष रतनलाल सुराणा, उपाध्यक्ष रतनलाल बोहरा, उपाध्यक्ष शांतिलाल मेहता, मंत्री प्रकाश पोरवाड़, कोषाध्यक्ष रमेशचन्द्र खाब्या, सहमंत्री रविन्द्रकुमार जैन एवं सहमंत्री सुनीलकुमार लोढ़ा ने संपूर्ण व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकारिणी सदस्य दिनेश पोरवाड़, महावीरकुमार सुराणा, निर्मलचंद कटारिया, पारसमल मेहता तथा प्रवीणकुमार आंचलिया का विशेष सहयोग रहा।इस अवसर पर संघ की सहयोगी शाखाओं के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें युवा अध्यक्ष सुरेन्द्र गुन्देचा, युवा मंत्री सुनील रांका, महिला मंडल अध्यक्षा कमलाबाई बोहरा, महिला मंडल मंत्री मीना गांधी, बहू मंडल अध्यक्षा अल्का लोढ़ा, बहू मंडल मंत्री शिखा आंचलिया, कन्या मंडल अध्यक्षा पलक दक तथा कन्या मंडल मंत्री महक गुन्देचा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
समारोह में बाबूलाल रांका, प्रकाश बुरड़, नेमीचंद दलाल, जसवंत गन्ना, सुनील नन्दावत, मुकेश बाबेल, सुरेन्द्र आंचलिया, पुखराज आंचलिया, हस्तिनापुर बाफना, विनय करुंगा, पदम बोहरा, ओम लूणावत, उत्तमभाई बांठिया, अभय बांठिया, पुखराज मेहता, राजेन्द्र प्रसाद कोठारी, राजेंद्र कोठारी, राजेश गोड़ावत, आनंद कवाड़, पंकज मेहता, शंकर दक, महावीर गुगलिया, विमल गुगलिया, सुरेश बोहरा, चैनराज छाजेड़, धनराज बोहरा, हस्तीमल बाफना एवं संजय कर्नावट, सिकंदराबाद से गौतम गुगलिया एवं सुरेन्द्र कटारिया, चेन्नई से अशोकजी चोरड़िया, रतन सिंघी, गौतम ओस्तवाल, जैन कॉन्फ्रेंस विहार सेवा के सदस्य तथा एसएमएस विहार सेवा के सदस्यों की विशेष उपस्थिति रही। चातुर्मास प्रवेश शोभायात्रा में युवा मंडल, महिला मंडल, बहू मंडल, कन्या मंडल एवं बालिका मंडल के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन श्री हंसराज मुणोत ने किया। वहीं मंत्री प्रकाश पोरवाड़ ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी का आभार व्यक्त किया।
चातुर्मास प्रवेश समारोह में विजयनगर सहित बेंगलुरु एवं बाहर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। समाजजनों ने विश्वास व्यक्त किया कि पूज्य साध्वी श्री के पावन सान्निध्य में आयोजित यह चातुर्मास विजयनगर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण बेंगलुरु के धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन को नई प्रेरणा प्रदान करेगा तथा आगामी चार माह तक नियमित प्रवचन, स्वाध्याय, तप, आराधना एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ समाज को प्राप्त होगा।
धर्मनगरी विजयनगर, बेंगलुरु में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ भव्य चातुर्मास प्रवेश समारोह

