सुरभि सलोनी डेस्क, लखनऊ। आजाद समाज पार्टी के नेता एवं उत्तर प्रदेश के नगीना सासंद चंद्रशेखर आजाद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वत मालाओं को लेकर दिए गए फैसले और मोदी सरकार के इस पर हलफनामे के बाद जो संकट आया है, जो संकट आए हैं उस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हम अरावली बचाने की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ेंगे। इसे लेकर आजाद ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री एवं भारत सरकार से कई सवाल भी किए हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि ‘यह लड़ाई सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहेगी, सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी। जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और प्रकृति के विनाश पर चुप्पी कोई विकल्प नहीं है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत हलफ़नामे में 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली माना न जाना और उनके खनन की अनुमति देना अत्यंत चिंताजनक है।
अरावली पर्वतमाला भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो दिल्ली के रायसीना हिल से गुजरात के पालनपुर तक लगभग 800 किलोमीटर लंबी है। रायसीना हिल की ऊंचाई समुद्र तल से बहुत अधिक नहीं है। लगभग 15 मीटर ऊपर ही है। इसके बावजूद, यह अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने के कारण सामरिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत के राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का केंद्र है, इसलिए इसे अक्सर भारत सरकार के केंद्र के रूप में देखा जाता है।
अरावली का पारिस्थितिक महत्व केवल ऊंचाई पर निर्भर नहीं है। यह परिभाषा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। खनन से भू-जल, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों को गंभीर क्षति होगी। यह निर्णय पूर्व के सर्वोच्च न्यायालय के संरक्षणात्मक आदेशों की भावना के विपरीत है।
आजाद ने पर्यावरण मंत्री से सवाल करते हुए लिखा – अगर 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली में शामिल न करने और खनन की अनुमति देने का निर्णय सही ठहरा, तो क्या रायसीना हिल और इसके आसपास के राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों को भी खनन माफियाओं के हवाले कर दिया जाएगा?
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि यह नीति लागू होती है, तो यह हमारी प्राकृतिक संपदा, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगी। हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह पर्यावरणीय नुकसान और लंबे समय तक होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय का तुरंत पुनर्विचार करे।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस और मोदी सरकार के खिलाफ लोगों ने उनकी मंशा को समझते हुए इसके खिलाफ आंदोलन शुरू दिया है तथा आने वाले समय अरावली बचाने का आंदोलन बड़ा स्वरूप ले सकता है।
चंद्रशेखर आजाद ने किया अरावली बचाने की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ने का ऐलान

