मुंबई:अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया उस पर नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया की छड़ी लगी है। इसी बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या फैसले पर कहा है कि वह भाजपा के वरिष्ठतम नेता एलके आडवाणी को धन्यवाद करने और उन्हें बधाई देने के लिए उनसे मिलने जाएंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ठाकरे ने कहा कि उन्होंने इसके लिए रथ यात्रा निकाली थी। मैं उनसे जरूर मिलूंगा और उनका आशीर्वाद लूंगा।
बाल ठाकरे ने अयोध्या फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। सभी को माननीय न्यायालय का फैसला स्वीकार कर लिया है। मैं 24 नवंबर को अयोध्या जाऊंगा।
बता दें कि संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि विवादित स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था। अदालत ने शनिवार को दो फैसले सुनाए। पहला फैसला शिया वक्फ बोर्ड की ओर से विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्माेही अखाड़े के दावे को भी खारिज करते हुए पार्टी मानने से इनकार कर दिया। अदालत दूसरे फैसले और प्रमुख अयोध्या केस में फैसला दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित स्थल पर अपना एकतरफा हक साबित नहीं कर सका। साथ एएसआई की रिपोर्ट भी बताती है ढांचे का निर्माण पहले से पहले किसी स्थल पर किया गया है। हालांकि 12 और 16 वीं सदी के बीच यहां कोई मंदिर था यह बात भी एएसआई की रिपोर्ट में साबित नहीं होती। अदालत ने रामलला विराजमान न्यास के दावे को सही माना और सरकार को आदेश दिया रामजन्मभूमि की पूरी जमीन रामलला न्यास को सौंप दी जाए और एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण कराया जाए। इसके पीछे अदालत ने विभिन्न यात्रियों द्वारा लिखी गई किताबों व लेखों को सबूत के तौर पर लिया जिसमें हिन्दू श्रद्धालुओं द्वारा विवादित स्थल पर पूजा अर्चना की बात कही गई है। इतना ही नहीं एएसआई की रिपोर्ट समेत अन्य सभी रिपोर्टों में राम चबूतरा और सीता रसोई का जिक्र किया गया है।
वहीं अदालत ने आदेश कि दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी स्थान पर 5 एकड़ जमीन दी जाए। अदालत के इस फैसले का सभी पक्षों ने स्वागत किया और इसी के साथ ही दशकों पुराने विवाद का अंत हो गया।
इस स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था।
अयोध्या फैसला : उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘आडवाणी जी से मिलने जाऊंगा’

