साध्वी निर्वाण श्री जी का अह्वान – तेरापंथ समाज जालना के नाम

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जालना। पूज्य प्रवर के चरण ज्यों-ज्यों महाराष्ट्र की धरती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मराठवाड़ावासियों के उत्साह में उद्रेक आ रहा है। सभी अपनी व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए तन – मन से जुड़े हुए हैं। जालना तेरापंथ सभा की ओर से सक्रियता कार्यशाला की समायोजना आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्री जी के सानिध्य में की गई। साध्वीश्री जी  उपस्थित श्रद्धालु भाई बहिनों को संबोधित करते हुए कहा- आचार्यवर  के आगमन का समय है जितना निकट आ रहा है आपकी तैयारियों में भी उतनी ही तत्परता अपेक्षित है। जितनी एकजुटता और तत्परता से कार्य संपन्न होगा, उतनी ही आपके क्षेत्र की सुवास अन्यत्र क्षेत्रों तक पहुंचेगी। इस संदर्भ में उन्होंने कार्य की सफलता के लिए तीन महत्वपूर्ण घटक – चिंतन, निर्णय और क्रियान्विति की भी चर्चा की। आचार्य श्री तुलसी द्वारा पदत्त ये सूत्र सफलता के सोपान है।
डॉ. साध्वी श्री योगक्षेमप्रभाजी ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा- समय आ गया है कि जालना का बच्चा बच्चा अब अपने दायित्व को समझें। आप लोगों के सामने एक ही नहीं दो–दो विराट आयोजन हैं। और उनके लिए उसी रूप में अपने आपको सन्नद्ध करना है। समय से पूर्व जो व्यक्ति अथवा संस्था अपनी तैयारियों को पूरा कर लेती हैं वह निश्चिंत हो जाती हैं। आचार्य श्री महाश्रमण जी के आगमन और प्रवास को आप सभी एक महायज्ञ रूप देखें और उसके लिए अपने आपको भी उसी रूप में प्रस्तुत करें।
इस अवसर पर सभा की ओर से सुरेंद्र धोका ने व्यवस्था समिति से जुड़ी सभी उपसमितियों एवं उनके संयोजकों  सहयोगियों की घोषणा की। पूरे समाज से सक्रियता से जुड़ने का विशेष  आह्वान भी किया। महिला मंडल   की अध्यक्ष नयना पीपाड़ा ने सुव्यवस्थित रूप में महिला कार्यकर्ताओं की संयोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बहनों के उत्साह की भूरी — भूरी सराहना की। साध्वी कुंदनयशाजी  द्वारा समुच्चारित  गीत के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यशाला में सभा, महिलामंडल, युवक परिषद के पदाधिकारियों से लेकर पूरे समाज की उल्लेखनीय उपस्थित रही। साध्वीवृंद द्वारा प्रदत्त दिशा दर्शन को सबने कार्यकारी महसूस किया । प्राक् वक्तव्य के रूप में साध्वी  श्रेयसप्रभा जी ने अपने विचारों की प्रस्तुति दी। यह जानकारी सचिन पिपाड़ा ने दी।

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