फिल्म रिव्यूः निम्न मध्यम वर्गीय परिवार की दशा बयां करती ‘यहां सभी ज्ञानी हैं’

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गड़ा धन, भूत-प्रेत और दहेज प्रथा का मारा देश का निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के जीवन में खुशी का पल बड़ी मुश्किल से आता है। और वह सुख कब आकर चला जाता है यह कहना बहुत मुश्किल है। ऐसे ही एक कानपुर के एक परिवार पर बुनी गई फिल्म ‘यहां सभी ज्ञानी हैं’ बनाई गई है। फिल्म में अतुल श्रीवास्तव, नीरज सूद, अपूर्वा अरोड़ा व विनीत कुमार ने मुख्य किरदार निभाए हैं जबकि  निर्देशन अनंत नारायण त्रिपाठी ने किया है।

कहानीः ‘यहां सभी ज्ञानी हैं’ कानपुर के एक मध्यम वर्गीय परिवार तिवारी (अतुल श्रीवास्तव) की कहानी है। तिवारी बड़े धार्मिक व्यक्ति हैं। वह अपनी पत्नी, बेटा, बेटी के साथ रहते हैं, जहां उनके साथ उनका साला गुड्डू (नीरज सूद) अपनी पत्नी, बेटे व मां-बाप के साथ रहता है। साले-जीजा में खूब जमती है। एक बड़ा सा घर है, जिसे वे बेचना चाहते हैं लेकिन ठीक से दाम नहीं मिलता। इसी बीच एक पंडित के पास जाते हैं, जहां पता चलता है कि उस प्रॉपर्टी में गड़ा हुआ धन है। पंडित उन्हें बेटी की शादी एक लोकल नेता बुन्नूभाई एमएलए के बेटे (विनीत कुमार) से करने की सलाह देता है और तिवारी मान जाते हैं। यह सोचकर कि गड़ा हुआ धन मिल जाएगा, जिससे सब हो जाएगा और मालामाल भी हो जाएंगे। अब वे गड़े धन के लालच में प्रापर्टी बेचने से मना करते हैं और बेटी की शादी बुन्नूभाई एमएलए के बेटे से तय कर देते हैं। बुन्नू भाई दहेज में अच्छी खासी रकम और गाड़ी मांगता है जिसे वे देने के लिए राजी भी हो जाते हैं। उसके बाद गड़े धन को निकालने में लग जाते हैं। इस बीच बेटी को चोट लगती है और उसकी याददाश्त भी चली जाती है। इधर शादी नजदीक आ जाती है और बैंड वाला, केटरिंग वाला, वीडियो कैमरा वाला सभी अपना एडवांस लेने घर तक आ जाते हैं। अब चूंकि गड़ा धन तो मिला नहीं है इसीलिए तिवारी परेशान हो जाते हैं। समय बीतता है और शादी की तारीख भी आ जाती है। घर पर बारात आती है और बुन्नूभाई दहेज की नकदी और गाड़ी के लिए अड़ जाता है लेकिन तिवारी के पास तो पैसे ही नहीं हैं। जिसके बाद व पहले क्या-क्या होता है यह सब जानने के लिए एक बार ‘यहां सभी ज्ञानी हैं’ देखने थिएटर जरूर जाएं। फिल्म में कॉमेडी के साथ ही निम्न मध्यम वर्गीय परिवार की स्थिति को बड़ी बारीकी से दिखाया गया है, जो वास्तव में आज भी जारी है। समाज पढ़ा-लिखा हो गया है लेकिन दहेज, भूत, गड़ा धन के चक्कर में अपनी दुर्दशा करवाता ही रहता है। फिल्म में कई बार ठहाके लगते हैं, कई बार भावनात्मकता नजर आती है और इसके साथ ही इन बुराईयों पर चोट किया गया है, जो आम दर्शकों को खूब पसंद आएगी, वह खुद भी उससे जुड़ा हुआ महसूस करेगा। थिएटर जाकर फिल्म देखेंगे तो निराश नहीं होंगे।

एक्टिंग/निर्देशनः फिल्म ‘यहां सभी ज्ञानी हैं’ में अतुल श्रीवास्तव और नीरज सूद की जोड़ी कमाल की है, दोनों ने अपना किरदार बहुत खूबसूरती से निभाया है। तिवारी की बेटी के किरदार में अपूर्वा अरोड़ा ने भी अच्छा किया है। लोकल विधायक की भूमिका में विनीत कुमार हमेशा की तरह मजेदार रहे हैं। बाकी किरदारों में मीना नाथानी, आकाश पांडे और आरव मिश्रा का भी अभिनय अच्छा है। फिल्म के हिसाब से अनंत नारायण त्रिपाठी का निर्देशन भी ठीक-ठाक रहा है।

कुल मिलाकर फिल्म मनोरंजन के साथ ही आम लोगों के मुद्दों पर बात करती है।

सुरभि सलोनी की तरफ से यहां सभी ज्ञानी हैं को 3.5 स्टार।

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