लोनावला में जिनशाशन की दो धाराओं का मिलन

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लोनावला। गुरुदर्शन के अभिष्टय लक्ष्य के साथ यात्रायित साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ठाणा 6 का श्रमणसंघ के प्रख्यात आचार्य डॉ श्री शिवमुनिजी म.सा. युवाचार्य श्री महेन्द्रमुनिजी म.सा. प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. का लोनावला की धरा पर आध्यात्मिक मिलन हुआ। जिनशाशन कि दो धाराओं के मिलन का नयनाभिराम दृश्य देखकर सैकडों लोग भावविभोर हो गए।
श्रमणसंघ के अनुशास्ता डॉ आचार्य श्री शिवमुनिजी ने कहा आचार्य महाश्रमणजी की अनुशासना में साधनारत आप सभी साध्वियों से मिलकर हमें प्रसन्नता हो रही है। ऋजुमना आचार्य महाश्रमणजी की विन्रमता हम सबको अभिभूत करने वाली है। तेरापंथ प्रभु का पंथ है, हम सब प्रभु पंथ के राही है। प्रभु पंथ राही हम सब जिनशासन की प्रभावना करते रहे, यही अभीष्ट है।
साध्वी अणिमाश्रीजी ने कहा जंहा भी अध्यात्म की धाराओं का मिलन होता है, वह भूमि तीर्थस्थली बन जाती है। आज लोनावला की धरती धन्यता की अनुभूति कर रही है। आचार्य भगवन्त युवचार्यजी एवं साधु साध्वियों से मिलकर मन आनंदित है। आचार्य श्री महाश्रमणजी व आचार्य शिवमुनिजी का जो घनिष्ठ संबंध है, वह हमें भी प्रेरणा देता है। दोनों सम्प्रदायों के श्रावक आज हर्ष विभोर हो रहे है। संत समागम का दुर्लभ अवसर आज सहज मिला है।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने अतीत के संस्मरणो का जीवन्त चित्रण कर अतीत को वर्तमान में आरोपित किया है। साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी, साध्वी मैत्रीप्रभाजी, साध्वी विश्वदर्शनाजी व साध्वी तिलकदर्शना जी की उपस्थिति रही।  महेंद्र तातेड़, गणपत कोठारी, अरविंद धाकड़, विकास डुंगरवाल, ललित हर्ष कोठारी, कांता तातेड़, पुष्पा कोठारी ने साध्वी अणिमाश्रीजी का साहित्य आचार्य श्री को भेंट किया।

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