रिमझिम वर्षा में 14 किमी विहार कर के.आर.पेट पधारे शांतिदूत आचार्य महाश्रमण

0
57

पूज्यवर ने प्रवचन में की जीवन-मृत्यु की व्याख्या

27-11-2019, बुधवार, के.आर.पेट, मंड्या, कर्नाटक। करुणासागर अहिंसा यात्रा यात्रा के प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ कर्नाटक राज्य में सानंद प्रवर्धमान है। मैसूर के पश्चात एक बार पुनःमंड्या जिले में विचरण कर रहे शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी अक्कीहेब्बालू स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल से विहार कर के.आर.पेट में पधारे। प्रातः विहार के शुरुआत में ही रिमझिम वर्षा प्रारंभ हो गई। संपूर्ण विहार मार्ग में थोड़ी-थोड़ी बरसात का दौर रहा। लगभग 14 किमी विहार कर शांतिदूत बाल गंगाधर स्वामी स्कूल में पधारे।
यहां पावन प्रेरणा देते हुए गुरुदेव ने कहा कि दुनिया में दो तत्व है जीव और अजीव। इन दो तत्वों में पूरी दुनिया आ जाती है। जीवन भी दो तत्वों वाला है आत्मा और शरीर। दोनों का योग है तो जीवन है। केवल आत्मा है और शरीर नहीं तो जीवन नहीं होता। जैसे सिर्फ परमात्मा होते हैं, उनके शरीर नहीं होता, वे शुद्ध आत्मा है। वैसे ही मृत्यु के पश्चात मृत्यु के पश्चात पार्थिव शरीर में जीवन नहीं है क्योंकि उसमें आत्मा नहीं है। आत्मा व शरीर साथ है तो जीवन है। मृत्यु आत्मा शरीर का वियोग होना है। पूर्णतया आत्मा का शरीर से मुक्त हो जाना मोक्ष है।
आचार्यश्री ने आगे कहा कि हर प्राणी की आत्मा एक जीवन के बाद दूसरे जीवन में जाती है। नया शरीर धारण करती है। जब तक कर्मों का बंधन है यह चक्र चलता रहता है। व्यक्ति को अपने किए गए कर्म स्वयं भोगने पड़ते है।  व्यक्ति को पाप का फल अवश्य मिलता है। कष्टों को भोगने के समय कोई रिश्तेदार या मित्र साथ नहीं देते। कर्ता के साथ कर्म का अनुबंध है। इसलिए व्यक्ति जीवन में ईमानदारी को महत्व दें। बेईमानी वाला कार्य न वाला कार्य न करें। अहिंसा और संयम जीवन में रहे तो वर्तमान जीवन के साथ अगली गति भी अच्छी हो सकती है। जीवन सदाचार पूर्ण रहना चाहिए। तत्पश्चात तेरापंथ के ग्यारहवें पट्टधर आचार्यश्री महाश्रमण जी ने के.आर. पेट के श्रावक समाज को सम्यक्त्व दीक्षा प्रदान की। यहां की महिला मंडल ने गीत का संगान किया, ज्ञानशाला के बच्चों ने भी सुंदर प्रस्तुति दी। मध्यान्ह में स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शांतिदूत के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यवर ने उनको जैन धर्म एवं अहिंसा यात्रा के बारे में जानकारी प्रदान की। शिक्षकों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी गुरुदेव से प्राप्त किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)