सम्यक्त्व साधना का मूल तत्व – आचार्य महाश्रमण

  • लगभग 16 किमी विहार कर केसुंबला में पधारे ज्योतिचरण

19.01.2023, गुरुवार, केसुंबला, बाड़मेर (राजस्थान)। रेतीले धोरों के मध्य मरुभूमि पर कड़कड़ाती ठंड में जहां आम जनता घरों से बाहर निकलने से पहले भी कई बार सोचती है ऐसे में अपनी आध्यात्मिक ऊष्मा से जन–जन के भीतर ज्ञान की रोशनी भरते हुए युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी पदयात्रा करते हुए निरंतर गतिमान है। आज प्रातः आचार्यश्री ने फलसुंड ग्राम से मंगल विहार किया। मुख्यमुनि श्री महावीर कुमार जी की जन्मस्थली फलसुंड आचार्यप्रवर के दो दिवसीय प्रवास से पावन हो उठी। विहार के क्षणों में भक्तों के भावपूर्ण स्वर गुरुवर से पुनः जल्दी पधारने की अर्ज कर रहे थे। नवनिर्मित तेरापंथ भवन से प्रस्थान कर शांतिदूत केसुंबला की ओर गतिमान हुए। आज विहार मार्ग में कई किलोमीटर तक मुरडिया की कच्ची रोड थी। पत्थरों, रेतीले पथ पर भी निरंतर गतिशील ज्योतिचरण लगभग 16 किलोमीटर का प्रलम्ब विहार कर केसुंबला ग्राम में पधारे। लगभग एक दशक बाद अपनी धरती पर अपने आराध्य के आगमन से क्षेत्रवासियों में अनूठा उल्लास नजर आ रहा था। जैन–अजैन हर कोई शांतिदूत का जय जयकारों से स्वागत कर रहे थे।
मंगल प्रवचन में आचार्यश्री ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि साधना के क्षेत्र में व्यक्ति के जीवन में सम्यकत्व का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सही दृष्टिकोण व यथार्थ ही सम्यक्त्व का रूप होता है। अगर सम्यक्त्व नहीं है तो बाकी किसी चीज का महत्व नहीं रहता। सम्यक्त्व के बिना व्रत, अप्रमाद, अकषाय, अयोग का भी मूल्य नहीं रहता। इसलिए यथार्थ के प्रति श्रद्धा दृढ़ रहे, सम्यक्त्व दृढ तथा पुष्ट हो तभी हम लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
केसुंबला आगमन के संदर्भ में आचार्यश्री ने कहा कि आज केसुंबला आना हुआ है। श्रावक समाज में अध्यात्म की चेतना बढ़ती रहे। मुनि ऋषि, मुनि रत्नेश क्षेत्र से जुड़े हुए है। दोनों अध्ययन में और विकास करते रहे, सेवा उपासना करते रहे।
इस अवसर पर साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी एवं मुख्यमुनि महावीर कुमार जी ने भी सारगर्भित उद्बोधन प्रदान किया। क्षेत्र से दीक्षित मुनि ऋषि कुमार जी एवं मुनि रत्नेश कुमार जी ने स्वागत में अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।
अभिनंदन के क्रम में श्री प्रकाश बुरड़, श्री नरपत महेशा, श्री मंगे खा हाजी धारू खा, आदि ने वक्तव्य दिया। तेरापंथ महिला मंडल, किशोर मंडल, कन्या मंडल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के बच्चों ने ज्ञानशाला गीत की प्रस्तुति दी।

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