लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में विशाल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

लखनऊ। लखनऊ में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया गया है। पहले दिन कथा माहात्मय का व्याख्यान करते हुए कथावाचक आचार्य कौशलेंद्र जी महाराज ने कहा कि रामायण महापुराण हमें आदर्श के साथ जीवन जीने के तरीके सिखाती है। भागवत महापुराण में भक्त को मरने से पहले क्या कर्म करे कि अपनी मुक्ति को प्राप्त कर सके उस सुगम मार्ग का मार्गदर्शन केवल भागवत महापुराण में मिलता है। भगवान की भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति करने का सबसे सरल उपाय राम नाम संकीर्तन है। मनकामेश्वर मंदिर में विशाल संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया गया है। जिसकी शुरुआत सोमवार को कलश यात्रा के साथ हुई कथा वाचक आचार्य कौशलेंद्र जी महाराज हैं। कथा के पहले दिन पूरे नगर के महिलाओं के द्वारा काफी संख्या में कलश यात्रा में कलश यात्रा में शामिल हुई। आयोजन स्थल सुरेन्द्र नगर के मुख्य मार्ग होते हुए हाईकोर्ट तक गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान नगर के लोगो द्वारा घर-घर दरवाजे पर कलश आरती का आयोजन कर उनका स्वागत किया गया। कथा 3 बजे से हरि इच्छा पर्यन्त तक आयोजित की जा रही है। जिसमें पहले दिन गौरी गणेश देवी पूजन पोथी पूजन व भागवत यज्ञ के बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री यज्ञ के बारे में बताया कि रोजाना सुबह होगा रुद्राभिषेक व भागवत का मूल पाठ होगा
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल ने बताया कि यह मंगल-कलश समुद्र मंथन का भी प्रतीक है। सुख और समृद्धि के प्रतीक कलश का शाब्दिक अर्थ है- घड़ा। जल को हिन्दू धर्म में पवित्र माना गया है। अत: पूजा घर में इसे रखा जाता है। इससे पूजा सफल होती है। यह कलश उसी तरह निर्मित है जिस तरह की अमृत मंथन के दौरान मदरांचल को मथकर अमृत निकाला था। जैसे जटाओं से युक्त नारियल मदरांचल पर्वत है। कलश विष्णु के समाय और उसमें भरा जल क्षीरसागर के समान है। उस पर बंधा सूत वासुकि नाग है जिससे मंथन किया गया था। यजमान और पुरोहित सुर और असुरों की तरह हैं या कहें कि मंथनकर्ता हैं।
श्रीमद् भागवत कथा में रोजाना सुबह 8 बजे से सामूहिक महारुद्राभिषेक का आयोजन कराया जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाले सप्ताह ज्ञान यज्ञ में श्रीमद् भागवत महापुराण का मूल पाठ भी कराया जा रहा है। जिसमें दर्जनों जोडे भाग लेंगे। हजार बेलपत्रों से सहस्रार्चन कर विधिवत पूजन किया जाएगा। हजारों भक्तों के मन में बहुत ही उत्साहित रहें और साथ ही मनकामेश्वर शनि मन्दिर के महंत राम उदय दास ने मुख्य यजमान की भूमिका में मौजूद रहे‌। साथ में आशुतोष शुक्ला, हरिशंकर शुक्ला, सूरज शुक्ला, पंकज दूबे, जयचंद कुशवाहा पवन नीरज तिवारी, जगदीश यादव, एडवोकेट दिव्यम मिश्रा, सहित हजारों भक्त कथा का लाभ लिए।

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