भगवान वर्धमान के प्रतिनिधि महातपस्वी महाश्रमण का बालोतरा में मंगल प्रवेश

  • बालोतरा में शांतिदूत का नव्य-भव्य स्वागत, लूणी नदी के पट पर उमड़ा श्रद्धा का सागर
  • बालोतरा का जन-जन स्वागत में दिखा तत्पर, पूरी नगरी बनी जनाकीर्ण
  • विशाल जुलूस संग तेरापंथ भवन में पधारे तेरापंथ के गणराज
  • बालोतरा में चारदिवसीय मंगल प्रवास के दौरान होगा वर्धमान महोत्सव का आयोजन
  • वर्धमान विद्या मंदिर से युगप्रधान आचार्यश्री ने बालोतरावासियों को दी पावन प्रेरणा

08.01.2023, रविवार, बालोतरा, बाड़मेर (राजस्थान)। लूणी नदी के तट पर बसा वस्त्र नगरी के नाम प्रख्यात राजस्थान के बाड़मेर जिले का एक मुख्य नगर बालोतरा। वस्त्र नगरी बालोतरा रविवार को मानों धर्मनगरी के रूप में आलोकित हो रही थी। चारों ओर भक्ति, आस्था, उमंग, उत्साह से ओतप्रोत श्रद्धालु अपने-अपने परिधानों में लूणी नदी के दूसरे छोर की ओर चले जा रहे थे। पूरा नगर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स व जैन ध्वज से पटा हुआ था। नगर के केवल जैन ही नहीं, अपितु सभी वर्गों के लोग उत्साह के साथ अपने घरों व गलियों को सजाए हुए थे। अवसर था इस वस्त्र नगरी में वर्धमान महोत्सव का करने तथा चार दिनों तक आध्यात्म की गंगा प्रवाहित करने के लिए वर्धमान के प्रतिनिधि, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणी के मंगल पदार्पण का।
ऐसे सुअवसर का लाभ उठाने के लिए बालोतरा की जनता पलक पांवड़े बिछाए हुए थी। रविवार को प्रातः लूणी नदी के दूसरे छोर पर स्थित जसोल के तेरापंथ भवन से आचार्यश्री के विहार से पूर्व ही सैंकड़ों की संख्या में बालोतरावासी श्रद्धालु अपने आराध्य की मंगल सन्निधि में पहुंच गए थे। आचार्यश्री ने जसोलवासियों पर आशीष वृष्टि करते हुए मंगल प्रस्थान किया। जसोलवासी भी अपने आराध्य के प्रति अपने कृतज्ञ भाव व्यक्त कर रहे थे। आचार्यश्री श्रद्धालुओं को अपने आशीष से आच्छादित करते हुए बालोतरा की ओर गतिमान हुए। जसोल से बालोतरा की कुल दूरी चार किलोमीटर के आसपास ही थी, किन्तु अपने आराध्य के अभिनंदन में उमड़ रहे श्रद्धालुओं अपार उपस्थिति ने इस दूरी को ही मानों मिटा दिया था। सिवांची-मालाणी के इस प्रमुख नगर में आचार्यश्री के अभिनंदन में जन-जन सम्मिलित था।
आचार्यश्री लूणी नदी पर बने पुल से बालोतरा की ओर पधार रहे थे तो जनता की विराट उपस्थिति से ऐसा लग रहा था जैसे लूणी नदी के तट पर आस्था का सागर लहरा रहा हो। यह सागर अध्यात्म जगत के महासागर आचार्यश्री महाश्रमणजी के स्वागत में उमड़ रहा था। गूंजते जयघोष, वाद्य यंत्रों के मंगल ध्वनि से पूरा वातावरण महाश्रमणमय बन रहा था। आचार्यश्री के पीछे चल रही विशाल जनमेदिनी से मानों पूरा नगर की जनाकीर्ण नजर आ रहा था। नव्य-भव्य विशाल स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री बालोतरा नगर स्थित तेरापंथ भवन में पधारे तब तक दोपहर के एक बज चुके थे। जन-जन की भावनाओं को स्वीकार करने और विशाल जुलूस के कारण आचार्यश्री को कुल चार किलोमीटर के आसपास की दूरी को तय करने में पांच घण्टे से भी अधिक समय लग गया। आचार्यश्री का बालोतरा में चारदिवसीय प्रवास यहीं निर्धारित है।
प्रवास स्थल से कुछ दूरी पर स्थित वर्धमान आर्दश विद्या मंदिर के प्रांगण में बने विशाल वर्धमान महोत्सव के पण्डाल में आचार्यश्री पधारे तो पूरा पंडाल जयघोष से गुंजायमान हो उठा। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि तपस्या आध्यात्मिक जगत का महत्त्वपूर्ण शब्द है। निर्ग्रन्थ साधु के लिए तो उसकी तपस्या ही धन है। इसलिए साधु को तपोधन भी कहा जाता है। योग-साधना, कषाय मुक्तता और उसका ज्ञान ही साधु का वास्तविक धन-संपदा होती है। गृहस्थ भौतिक संपदाओं मंे धनाढ्य हो सकते हैं, किन्तु साधु के साधना, तप और संयम रूपी धन के आगे इनका को मोल नहीं होता। गृहस्थ भी अपने जीवन में जितना संभव हो सके, संयम और समता रूपी धन के अर्जन का भी प्रयास करे, तो आगे के जीवन की लिए अच्छा हो सकता है।
आचार्यश्री ने बालोतरा आगमन के संदर्भ में कहा कि आज बालोतरा में आना हुआ है। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी ने चतुर्मास किया, आचार्यश्री महाप्रज्ञजी भी पधारे और मेरा भी आना हो गया है। यहां के लोगों का भी धार्मिक-आध्यात्मिक विकास होता रहे। आचार्यश्री के स्वागत बालोतरा तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री धनराज ओस्तवाल, नगर परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा बैद मूथा व स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री देवराज खिंवेसरा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज ने अपने आराध्य के अभिनंदन में स्वागत गीत का संगान किया।

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