गणपत भंसाली, सूरत (गुजरात)।
इस भौतिकता भरे माहौल में अमूमन यह सुनने में आता है कि वर्तमान में लोगों की धर्म-अध्यात्म के प्रति रुचि घटती जा रही है, व आज के दौर की युवा पीढ़ी तो धर्मस्थलो की चौखट तक नही छूना चाहती आदि-आदि, लेकिन लोगों के मन मे पैठी इस मान्यता को झुठला रही है इस चातुर्मास काल मे प्रतिदिन सुबह-सुबह सूरत के सिटीलाइट स्थित तेरापंथ भवन की औऱ उमड़ती विशाल जनमेदिनी, इस मार्ग पर प्रतिदिन सुबह 7.30 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता सा लग जाता है, स्थिति यह होती है कि तेरापंथ भवन की और जाने वाले तीनो ही रास्तों पर दो पहिया, चार पहिया व पैदल चलने वालों की कतार सी लग जाती है, तथा श्रद्धालुओं का जनसैलाब सा उमड़ा पड़ता है।
तेरापंथ भवन के विशाल परिसर के चहुं ओऱ व आस-पास रखे व्यवस्थित व कतारबद्ध वाहनों की विशाल संख्या को देख कर तो वहां से गुजरने वाले अनभिज्ञ राहगीर तो हेर्रत में पड़ जाते होंगे कि आखिर इस मार्ग पर इतने वाहनों का जमावड़ा क्यों ? क्या यहां कोई ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम है या कोई पिक्चर हॉल में नई पिक्चर लगी जो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है, दरअसल ये जनसमूह उमड़ता है सूरत के सिटीलाइट स्थित तेरापंथ भवन के महाप्रज्ञ सभागार में प्रवचन श्रवण करने हेतु, जहां कि उग्रविहारी व तपोमूर्ति के रूप में प्रख्यात मुनि श्री कमल कुमार जी के नियमित प्रवचन होते है, गौरतलब है कि शान्तिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती सन्त मुनि श्री कमल कुमार जी आदि ठाणा-3 का चातुर्मास गत 12 जुलाई को इस तेरापंथ भवन में प्रारम्भ हुआ है। मुनि श्री की प्रतिदिन की दिनचर्या निर्धारित है, आपके सान्निध्य में प्रात 8 बजे से ही धर्म सभा प्रारम्भ हो जाती है, जहां भक्ताम्बर, प्रेक्षाध्यान व प्रवचन मंगलपाठ आदि की नियमित प्रक्रिया होती है। स्थिति यह है कि 16000 वर्ग फुट का विशाल सभागार छोटा पड़ जाता है, ऐसा पहली बार हुआ है कि सोमवार से शनिवार के वर्किंग डे में भी यह हॉल खचाखच भर जाता है, व अब तो हर दिन सभागार के बाहर स्थित पार्किंग जोन तक में अतिरिक्त कुर्सियां लगानी पड़ती है, विशेष बिंदु यह भी हैं कि प्रवचन सभा मे 50 प्रतिशत के करीब उपस्थिति युवा पीढ़ी की नजर आती है।
उल्लेखनीय यह भी है कि सभागार में 95 प्रतिशत श्रद्धालु सामायिक धारण किए हुए नजर आते है, मुनि श्री कमल कुमार जी की प्रवचन शेली ओजस्वी व तेजस्वी हैं, हर कोई श्रद्धालु उनकी स्मरण शक्ति के कायल है, आपकी प्रवचन शैली बड़ी ही आकर्षक रहती है, प्रवचन के बीच-बीच में आशु कवि की तर्ज पर गजब की व प्रभावी तुकबंदी के रंग नजर आते है, प्रवचन सभा मे बिना किसी स्वंयसेवकों के श्रद्धालु अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध मुनि श्री के व्यख्यान का श्रवण करते है, पूरे प्रवचन काल मे पिन ड्राप साइलेंट सा वातावरण बना रहता है, मुनि श्री का प्रवचन एक दृष्टि से सार भरा रहता है व असरदार भी साबित होता है, यही वजह है कि उपवास से लेकर दीर्घ तपस्या के प्रतिदिन तादाद में प्रत्याख्यान हो रहे है, ऐसा नजारा तो पहली बार देखा जा रहा है कि सभागार में श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह ठीक 8 बजे पहुंच जाते हैं व प्रात 9 बजे तक विशाल सभागार में हाउसफुल की स्थिति बन जाती है, यहां तक अनेक श्रद्धालु दोनो औऱ की बॉलकानी में सामयिक करते नजर आते है, इस स्थिति में ट्र्स्ट मण्डल तथा तेरापंथ सभा सूरत के पदधिकारियों के लिए भी यह चुनोती भरा विषय हो गया कि रविवार व छुट्टियों के दिन तथा पर्युषण पर्व की अवधि में इस विशाल जनमेदिनी की बैठक व्यवस्था को किस तरह पूरी कर पाएंगे ? जो परिदृश्य नजर आ रहा है उस हिसाब से तो महाप्रज्ञ सभागार,मैत्री हॉल व शुभम हॉल जैसे विशाल हॉलों में स्क्रीन की व्यवस्था करने के बावजूद स्थल छोटा पड़ने की संभावना है, विशेष बिंदु यह भी हैं कि सूरत के उपनगर उधना स्थित तेरापंथ भवन में साध्वी श्री सरस्वती जी ठाणा-7 का चातुर्मास भी है, उसके बावजूद सिटीलाइट स्थित तेरापंथ भवन में हाउसफुल की स्थिति है, हालांकि आध्यात्मिक व भौतिक दोनो की अलग-अलग राहें है अतः उनकी तुलना नही हो सकती लेकिन हम एक सटीक विश्लेषण करें तो ताज्जुब यह है कि इस भौतिक युग मे जहां पिक्चर हॉलों में करोड़ो-अरबो के महंगे बजट की नई फिल्म रिलीज होने व बड़े व महंगे कॉस्ट के सितारों की फ़िल्म प्रदर्शित होने पर दर्शकों की भीड़ यदा-कदा ही उमड़ पातीहै, तथा तीन-चार स्क्रीनों में जितने दर्शक नही जुट पाते उससे अधिक इस भौतिक युग मे लगातार चार माह तक ओर वो भी प्रात 8 बजे धर्म-आध्यत्म सभा मे मुनि श्री की प्रवचन सभा में हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ जाना हर किसी के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ हैं, सचमुच में आश्चर्य है, सही मायनों में यह ज्योतिचरण महाश्रमण जी की आध्यात्म रूपी वाटिका के एक पुष्प कमल मुनि का कमाल है।
अहो आश्चर्यम ! प्रवचन सभा मे सुबह 8 बजे हो जाता है हाउस फुल, कमलमुनि का कमाल…

