मुंबई:माफिया डॉन अबू सलेम को बड़ा झटका लगा है। जेल से बाहर निकलने की उसकी चाल विफल हो गई है। सलेम ने भारत में प्रत्यर्पण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर पुर्तगाल कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे लिस्बन प्रशासनिक कोर्ट ने खारिज कर दिया गया है। सलेम ने 2014 में भी पुर्तगाल कोर्ट कोर्ट में याचिका दायर करके भारत पर इसी तरह के आरोप लगाए थे।
अबू सलेम 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन हत्या केस और 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों में दोषी पाया गया था और 25 साल कैद की सजा काट रहा है। सलेम को पुर्तगाल के लिस्बन में 20 सितंबर 2002 में गिरफ्तार किया गया था। प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे 2005 में भारत को सौंपा गया था। लिस्बन कोर्ट ने सलेम को प्रत्यर्पित करने का आदेश देते हुए शर्त रखी थी कि सलेम को फांसी की सजा नहीं दी जाएगी।
गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका को खारिज करते हुए लिस्बन प्रशासनिक कोर्ट 5 ऑर्गेनिक यूनिट ने कहा कि यह उसका क्षेत्राधिकार नहीं है, क्योंकि यह मामला राजनीतिक और कूटनीतिक है। कोर्ट ने कहा कि सलेम की दलीलें प्रशासनिक प्रकृति की नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत आता है।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मा अबू सलेम बेहद कम समय में अमीर बनने की चाहत रखता था। उसकी इसी चाहत ने उसे एक मोटर मैकेनिक से अंडरवर्ल्ड डॉन बना दिया। मुंबई में टैक्सी ड्राइवर से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन बनने तक का सफर उसने कुछ ही सालों में पुरा कर लिया।

