आत्मा के अस्तित्व पर आचार्य श्री ने किया विश्लेषण
मंगलभावना में अनेक वक्ताओं ने दी भावाभिव्यक्ति
10-11-2019 रविवार , कुम्बलगोडु, बेंगलुरु, कर्नाटक। तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता-शांतिदूत-अहिंसा यात्रा के प्रणेता-महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनमेदिनी को अपने उद्बोधन में राजा प्रदेशी और कुमारश्रमण, केशी के मध्य हुई चर्चा का विश्लेषण करते हुए आत्मा और शरीर के अस्तित्व के विषय में फरमाते हुए कहा कि राजा मुनि से आत्मा के अस्तित्व बताने के लिए कहा तो मुनि ने कहा कि आत्मा अमूर्त है। यह हवा, आकाश और प्रकाश के समान है जिस प्रकार हवा से पत्ता हिलता है पर हवा दिखाई नहीं देती है। जैसे दिये का प्रकाश हर तरफ जाता है वह जहाँ तक दिखाई दे। अगर उस पर ढक्कन लगा दिया तो प्रकाश संकुचित हो जाएगा। जैसा स्थान उतना वहाँ प्रकाश वैसे ही जितना बड़ा शरीर उतनी बड़ी आत्मा फैल जाती है।
साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने अपने वक्तव्य में फरमाया कि जिनके हिंसा रोम-रोम में रहती है वह जीवन में कभी उपरित नही होता है। हम उदितोउदित कैसे रहे यह इस चातुर्मास में पूज्य गुरुदेव ने हमें समझाया है। साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने प्रेरक उद्दबोधन में फरमाया कि सम्यक्त्व प्राप्ति के लिए क्या पुरुषार्थ करे और क्या लाभ होता है। सम्यक्त्व प्राप्ति के बाद मोक्ष प्राप्ति हो जाती है। जघन्य और अंतरमुहूर्त से वह उत्कृष्ट में पहुँच जाता है।
कार्यक्रम में साध्वी रिद्धिप्रज्ञाजी द्वारा शोध “समाज दर्शन “ग्रंथ का लोकार्पण जैन विश्व भारती अध्यक्ष रमेश बोहरा आदि द्वारा किया गया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के द्वितीय दिवस के प्रारंभ में “वसुधैव कुटुम्बकम” थीम पर देश भर से समागत परिषदें अपने क्षेत्र के परिधानों में सजधज कर रैली के साथ प्रवचन में पहुंचे।
चातुर्मास व्यवस्था समिति द्वारा कृतज्ञता के स्वरों में स्वागताध्यक्ष नरपतसिंह चोरड़िया, अमित नाहटा, मदन बरमेचा, ललित आच्छा, सुशील चौरड़िया, मांगीलाल पारख, हैदराबाद चातुर्मास व्यवस्था समिति अध्यक्ष श्री प्रकाश बरड़िया ने भावाभिव्यक्ति दी। कन्यामंडल, ज्ञानशाला, किशोर मंडल द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई।

