पंकज श्रीवास्तव/ रांची। झारक्राफ्ट के पूर्व सीईओ रेणु गोपीनाथ पाणिक्कर को पद से इस्तीफे दिये हुए तकरीबन एक साल से ऊपर हो गया है, बावजूद इसके जादूगोड़ा की ‘जादू’ की चर्चा हर आम और खास की जुबान पर है लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया मौन है। केरल की लड़की महज बीए पास होकर झारक्राफ्ट के सीईओ पद पर कैसे पहुँच गयी जबकि उक्त पद के लिए बड़े-बडे मैनेजमेंट स्कूलों से डिग्री लिए अनुभव वाले इस दौड़ में थे लेकिन उन्हें दरकिनार कर दिया गया। मामला पूर्वी सिंहभूमि जिले के जादूगोड़ा से शुरु होता है। केरल के एक व्यक्ति यहां पोस्टेड होते हैं ये वही वक्त है जब झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री रधुवर दास वहां आरएसएस के अनुषांगिक संगठन बीएमएस यानि भारतीय मजदूर संघ के प्रचारक के रुप में काम कर रहे होते हैं।
सीएम रधुवर और इस परिवार का परिचय होता है। उस वक्त कर्मचारी की बेटी रेणु अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रही होती है। 12वीं पास करते ही उसके पिता अवकाश प्राप्त कर लेते हैं। रिटायरमेंट के बाद ये परिवार अपने गृह राज्य केरल वापस चला जाता है। वक्त का पहिया घूमता है और आरएसएस प्रचारक रधुवर दास झारखंड के मुख्यमंत्री बन जाते हैं। अतीत की नींव पर रेणु रधुवर दास से सम्पर्क करती है। रधुवर दास भी शायद बीते हुए लम्हों को नहीं भूले थे। आनन-फानन में रेणु को राँची बुलाने की व्यवस्था होती है। इसके लिए पहली बार झारखंड में झारक्राफ्ट सीईओ जैसा बड़ा पद सृजित किया जाता है। चूंकि पद बड़ा है इसलिए सरकारी नियम-कायदे से पद के लिए विज्ञापन निकाला जाता है। विज्ञापन की तमाम शर्ते होती हैं। जो इस प्रकार हैं – आवेदक को अपने पिछले नौकरी के तीन पे स्लिप आवेदन के साथ अटैच करना है। उम्र होती है अधिकतम 45 साल, अनुभव होता है 5 साल। इनकी नियुक्ति में इन सारे नियम कानून एवं मापदंड को अनदेखी कर दिया गया।
सूचना के अधिकार अंतर्गत इसका पर्दाफाश भी हुआ उसके अनुसार इनका अनुभव प्रमाण पत्र जुगाड़ तकनीक वाली थी। तीन पे स्लिप इन्होने दिया ही नहीं। उनके नियुक्ति एवं शैक्षणिक योग्यता के गड़बड़ी के सवाल पर बिहार के मुजफ्फरपुर वासी प्रख्यात आरटीआई एक्टिविस्ट हेमन्त कुमार ने सबसे पहला सवाल उठाया और अंततः इसका पर्दाफाश किया। सरकार की किरकिरी होता देख इनको उसी वक्त इस्तीफा देने की सलाह दी गयी थी लेकिन मुख्यमंत्री की करीबी का फायदा मिला। फिर एक बार हेमंत कुमार ने इनके कैग से इनके कार्यकाल में कंबल घोटाले से जुड़ी सूचना मांगी। कैग के रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई कि कंबल निर्माण में जबर्दस्त घोटाला हुआ है। कंबल पंजाब हरियाणा से मंगाकर दिखा दिया गया कि झारखंड के बुनकरों ने बनाया है। कैग रिपोर्ट के जरिये फिर आरटीआई एक्टिविस्ट हेमन्त कुमार ने झारखंड सरकार से जांच एवं कारवाई मांग की। मामले को विपक्ष ने लपका और अंततः रेणु को इस्तीफा देना पड़ा। अब कई कहानियां विपक्षी नेताओं के मार्फत हवा मे तैर रही हैं कि सरकार के कामकाज के बहाने मुख्यमंत्री के सभी विदेशी दौरे में सुश्री पाणिक्कर उनके साथ मौजूद रही हैं। झारखंड के जेलों के लिए बड़े पैमाने पर कंबल की खरीद की गयी।
आरएसएस प्रचारक रहे झारखंड सीएम सवालों के घेरे में!, झारक्राफ्ट के सीईओ पद पर कैसे पहुंची रेणु गोपीनाथ पाणिक्कर

