नई दिल्ली:लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना की बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। देश में इसको लेकर लगातार उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चल रहा है। कुछ देर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7, लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक की। इस बीच बुधवार को भारत और चीन के बीच गलवान घाटी को लेकर मेजर जनरल स्तर की बातचीत हुई लेकिन यह बेनतीजा रही।
समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अभी फौरन हटने या स्थिति में परिवर्तन में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। आने वाले दिनों में और ज्यादा बातचीत हो सकती है। इससे पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्षीय वांग यी के बीच लद्दाख में सैनिकों के बीच हिंसक झड़प को लेकर फोन पर बात हुई। विदेश मंत्री ने साफतौर पर उन्हें कह दिया कि चीन की तरफ से प्लानिंग कर इस घटना को अंजाम दिया गया है। इस अप्रत्याशित एक्शन का द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर होगा।
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि समय की जरूरत ये थी कि चीन की तरफ से अपने एक्शन का आकलन किया जाता और सही दिशा में कदम उठाया जाता। सैनिकों को वास्तविक नियंत्रण रेखा का दृढ़तापूर्वक सम्मान करना चाहिए और इसे बदलने के लिए कोई एकपक्षीय कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चीनी विदेश मंत्री से फोन पर कहा कि यह आपसी सहमति बनी थी कि पूरी स्थिति को जिम्मेदार तरीके से संभाला जाएगा और दोनों पक्ष तनाव कम करने की तरफ पहल करेंगे।
भारत सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत पर जोर देते हुए कहा कि भारत और चीन को दोनों नेताओं (पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग) में बनी सहमति का अनुसरण करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को मतभेदों को दूर करने के लिए मौजूदा संवाद तंत्र मजबूत बनाना चाहिए।
बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि गलवान घाटी झड़प से उत्पन्न हालात से ठीक से निपटा जाएगा। दोनों देश सैन्य स्तर की बातचीत में बनी सहमति के मुताबिक कदम उठाएंगे और मौके पर स्थिति को जितनी जल्दी संभव हो शांत करेंगे। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के मुताबिक सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई।
गौरतलब है कि सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई। इसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए तो चीन के भी 40 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं। 1975 के बाद पहली बार इस तरह की हिंसक घटना को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत शांति चाहता है लेकिन उकसावे पर माकूल जवाब देने का सामर्थ्य रखता है।

