नई दिल्ली:अमेरिका ने इराक में तैनात अपने सैनिकों की संख्या और कम करने की योजना की पुष्टि की है जिसके तहत वह आगामी कुछ महीनों तक इराक में अपनी सैन्य मौजूदगी में कटौती करना जारी रखेगा। अमेरिका और इराक की सरकार ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर इस बात की जानकारी दी है।
अमेरिका-इराक के बीच गुरुवार को रणनीतिक बातचीत के बाद जारी एक वक्तव्य के मुताबिक दोनों देश इराक में मौजूद रहने वाली सेना को लेकर भी बातचीत करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार देर रात जारी वक्तव्य के मुताबिक दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी के तहत यह पाया गया कि इस्लामिक स्टेट का सफाया करने में काफी हद तक महत्वपूर्ण कामयाबी मिली है। आगामी कुछ महीनों के दौरान अमेरिका इराक में तैनात अपने सैनिकों की संख्या और कम करेगा। अमेरिका ने इराक की सरकार से मौजूदा सुरक्षा स्थिति की चचार् करने के बाद यह फैसला लिया है। दोनों देश मजबूत साझा हितों पर आधारित द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को विकसित करना चाहते हैं।
इस बातचीत में हिस्सा लेने वाले अमेरिका के पूर्वी मामलों के सहायक सचिव डेविड स्चेनकर ने मीडिया को बताया कि इराक में सैन्य मौजूदगी को कम करने पर विचार किया जा रहा है लेकिन इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गयी है। अमेरिका ने यह बात एक बार फिर दोहरायी कि इराक में उसे स्थायी रूप से अपनी सेना तैनात नहीं करनी है इसलिए उसे स्थायी सैन्य अड्डों की आवश्यकता नहीं है। इराक की सरकार अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के सैन्यकर्मियों और अपनी सेना के हितों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि इस वर्ष जनवरी में अमेरिका ने बगदाद हवाई अड्डे के नजदीक हवाई हमला कर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी और इराक की अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ी हश शाबी के उपकमांडर अबू मेंहदी अल-मुहांडिस की हत्या कर दी थी जिसके बाद अमेरिका और इराक के रिश्तों में तनाव आ गया था।
इसके बाद इराक की संसद में एक प्रस्ताव पारित कर देश में विदेशी सेना की मौजूदगी खत्म करने की मांग की गयी थी। हाल के महीनों में इराक में अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाकर कई बार मोटार्र और रॉकेट से हमले किए गए हैं। इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई के लिए अमेरिका ने अपने पांच हजार से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। अमेरिकी सेना इराक की सेना को प्रशिक्षण और सलाह भी देती है।

