नेता/विधायक अपने बच्चों को घर ला रहे हैं, जबकि सामान्य सामान्य स्टूडेंट और मजदूर अभी भी फंसे हुए हैं
पंकज श्रीवास्तव/पटना। लॉकडाउन के दरम्यान भाजपा विधायक ने अपनी बेटी को कोटा से लाकर सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। अभी ये मामला पूरी तरह ठंडा भी नहीं पड़ा है कि मुजफ्फर से एक और मामला प्रकाश में आया है। ताजा मामला भी सत्ताधारी दल यानि जदयू से जुड़ा है। मुजफ्फरपुर जिला जदयू के पूर्व पार्षद विजय झा का है। फिलहाल उनकी पत्नी पार्षद हैं। विजय झा जदयू एमएलसी दिनेश सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्होंने ने अपनी बेटी और उसकी सहेली को कोटा से वापस लाने के लिए आनन फानन में सरकारी आदेश यानि स्पेशल पास निर्गत कराया और सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर लाने में कामयाब हो गये।
इस बीच बिहार से बाहर फंसे छात्रों के लिए पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार को तलब किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने अडियल रुख पर कायम है कि किसी सूरत में वो बाहर फंसे छात्रों को बिहार लाने के पक्ष में नहीं हैं, जबकि उनकी ही पार्टी और सहयोगी दलों के नेता/विधायक पास बनवाकर अपने बच्चों को लेकर आ रहे हैं, जिस पर वे कुछ नहीं बोल पा रहे हैं।
आम लोगों के बच्चों व मजदूरों को बाहर से बिहार लाने के मामले में उनकी दलील है कि अगर वो वापस आते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी के लॉक डाउन का कोई मतलब नहीं रह जायेगा। इधर इसी मामले पर पटना हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अजय कुमार ठाकुर ने एक आनलाईन पत्र चीफ जस्टिस संजय करोल को लिखा था। चीफ जस्टिस ने इसी पत्र पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को तलब किया है। जस्टिस संजय करोल ने कोटा ही नहीं बल्कि देशभर में तमाम जगहों पर फंसे बिहारी छात्रों की सुरक्षा और उनको राहत सुनिश्चित करने का सरकार को निर्देश दिया है।
पटना हाईकोर्ट इस मामले पर आज दोपहर तक सरकार को रिपोर्ट देने को कहा है। चीफ जस्टिस ने बिहार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह राजस्थान के मुख्य सचिव से बात कर यह सुनिश्चित करें कि बिहार के बाहर फंसे तमाम बिहारी छात्रों को सुरक्षा उपलब्ध हो। इसके अलावा उन छात्रों तक तुरंत राहत पहुंचाई जाए।

