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सबरीमाला:धर्मस्थलों पर महिलाओं से भेदभाव: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वकीलों में मतभेद, बहस के मुद्दे अब हम तय करेंगे

Last updated: February 3, 2020 4:19 pm
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सोमवार को सबरीमाला और अन्य धर्मस्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे पर सुनवाई की। इस दौरान वरिष्ठ वकीलों ने बेंच से कहा कि वह सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मामले में दूसरे मामलों को नहीं जोड़ सकती। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, पूर्व अटॉर्नी जनरल के पाराशरण और पूर्व सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने विरोध जाहिर किया। इन लोगों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े इस बड़े मुद्दे का फैसला कर सकती है। 9 जजों की बेंच ने कहा- दोनों पक्षों के वकीलों में बहस के मुद्दे को लेकर मतभेद हैं। सभी वकीलों ने हमें सुझाव दिया कि हम मुद्दे तय करें और हम यह करेंगे। सुप्रीम कोर्ट 6 फरवरी को समयसीमा और मुद्दे तय करेगी।

9 सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस आर भानुमती, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एमएम शांतानागौर, जस्टिस एसए नजीर, जस्टिस सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। बेंच सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के खतना और पारसी महिलाओं के गैर-पारसी से शादी करने पर अग्निमंदिर (पूजा स्थल) में जाने से रोक समेत 7 ऐसे मुद्दों की सुनवाई कर रही है, जो आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े हुए हैं।

हमें सबरीमाला पर पुनर्विचार नहीं, बड़ा मुद्दा तय करना है: सीजेआई
चीफ जस्टिस ने कहा- 5 जजों की बेंच ने सवाल तय किए। उन पर विचार जरूरी है। हम यहां सबरीमाला पुनर्विचार के लिए नहीं, बल्कि बड़े मुद्दे को तय करने के लिए बैठे हैं, जिसमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग जैसी मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिद में प्रवेश मांग रही हैं। इसके साथ ही दाउदी बोहरा में महिलाओं का खतना और पारसी महिलाओं के दूसरे धर्म में शादी करने पर अगियारी पर रोक को चुनौती दी गई है। एक वर्ग का कहना है कि मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में तो प्रवेश कर सकती है लेकिन वो पुरुषों के साथ इबादत नहीं कर सकतीं।

वकील फली नरीमन ने 5 जजों की संविधान पीठ के फैसले को बड़ी बेंच को भेजने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सबरीमाला में महिलाओं के जाने पर पुनर्विचार करते हुए दूसरे धर्मों की परंपराओं को इसमें जोड़ दिया गया। इसकी जरूरत नहीं थी। इस पर बेंच ने कहा कि हम इस मुद्दे पर भी विचार करेंगे।

ये ऐसे मुद्दे, जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा: सिब्बल

वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा- ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा। आप जो भी बोलेंगे उसका असर सभी पर होगा। इसका असर जाति व्यवस्था पर भी पड़ेगा, आप इसे कैसे तय करेंगे? इस पर सीजेआई ने कहा- हम इस आपत्ति को एक मुद्दे के रूप में समझेंगे और सुनेंगे भी… हम केवल उन लेखों की व्याख्या तय करने जा रहे हैं जो सबरीमाला और अन्य मामलों में भी लागू किए गए हैं। सीजेआई ने गुरुवार को कहा था कि अदालत सुनवाई के दौरान महिला अधिकारों, धार्मिक विश्वास जैसे बिंदु पर न्यायिक समीक्षा की गुजाइंश पर विचार करेगी।

धार्मिक आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े 7 मुद्दों पर सुनवाई होगी

सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को चार वरिष्ठ वकीलों से सुनवाई के मुद्दे तय करने के लिए कहा था। पिछले दिनों सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वकीलों ने इस पर चर्चा की, लेकिन वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके, अब सुप्रीम कोर्ट ही इसे तय करे। संविधान पीठ केवल धार्मिक आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े उन 7 मुद्दों पर सुनवाई करेगी, जो 5 जजों की पीठ ने सबरीमाला मंदिर मामले में सुनवाई के दौरान तय किए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी

पिछले साल 14 नवंबर को सर्वोच्च अदालत की 5 जजों की बेंच ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजते हुए कहा था कि पूजा स्थल पर महिलाओं और लड़कियों के प्रवेश पर पाबंदी सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं है। बल्कि मस्जिदों और पारसी महिलाओं के पवित्र अग्नि स्थल में प्रवेश को लेकर भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2018 को केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के खिलाफ केरल में काफी विरोध हुआ था। इस फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुईं।

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