मुंबई। मर्यादा पुरुषोत्तम आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ का नया विधान रचा । संग को सुरक्षा प्रदान करने वाली मर्यादाएं तेरापंथ की आनबान और शान है। पांच महाव्रत , पांचसमिति और तीन गुप्तियां जैन साधु का मूलाचार है।नियम — उपनियम उसके परकोटे है।एक आचार एक विचार और एक आचार्य की त्रिवेणी है तेरापंथ की मर्यादाएं–ये उद्गार महातपस्वी आचार्य श्रीमहाश्रमण जी के सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री जी ने व्यक्त किए ।
जालना में 156वें मर्यादमहोत्सव के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए साध्वीश्री निर्वाणश्री जी ने कहा — साधु – साध्वी अपने सभी कार्यों का नियोजन — संयोजन गुरु आज्ञा से करें। मनमानी पर प्रहार हैं मर्यादाएं । विहार– चातुर्मास का निर्णय गुरु स्वयं करें । जिससे साताकारी क्षेत्रों की अभीप्सा न रहें। साध्वी श्री ने हाजरी का वाचन किया।
प्रबुद्ध साध्वी डॉ.योगक्षेमप्रभाजी ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा – श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन की संगम भूमि है- तेरापंथ। जिनवाणी के प्रति अगाध श्रद्धा ,गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और अनुशासन में निष्ठा हो तो साधक का जीवन सफल और सुफल होता है। तेरापंथ संघ की नींव में यही श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन भरा गया है ।तेरापंथ की दीर्घजिविता का आधार है– तेरापंथ की मर्यादाएं।
साध्वी लावण्यप्रभा जी ने अपने वक्तव्य में मर्यादा निर्माता आचार्य भिक्षु और मर्यादोत्सवप्रदाता श्रीमद् जयाचार्य की गुणोत्कीर्तना की।
साध्वीयोगक्षेमप्रभाजी , साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी कुंदनयशाजी, साध्वी मुदितप्रभा, जी ,साध्वी श्रेयसप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी ने “उत्सव मर्यादाओं का मनाएं हम” गीत तरह भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ *”भिखणजी स्वामी भारी मर्यादा बांधि” संघ में गीत के साथ हुआ। तेरापंथ महिला मंडल व कन्या मंडल ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभा से पवन जी सेठिया ,तेममं अध्यक्ष सौ. नयना पीपाड़ा ने भाव भरी अभिव्यक्ति दी। अपने विचारों की प्रस्तुति के क्रम में सौ. सरिता सेठिया सौ., अनीता जोगड़ सौ. स्वरूपा पीपाड़ा ने अपने भाव प्रकट किए।
मूर्तिपूजक संप्रदाय की ओर से विनय कुमारजी आबड ने मर्यादा महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए तेरापंथ की भूरी भूरी प्रशंसा की। मूर्तिपूजक संघ से उत्तम चंद जी बनवट, सुदेशजी सकलेचा (स्थानकवासी संघ अध्यक्ष )मू.पू.संघ से विनय जी आबड, दिगम्बर संप्रदाय से माणकचन्दजी कासलीवाल ,आदि का सभा की ओर से स्वागत किया गया। इस अवसर पर मेहकर , लोणार ,सिल्लोड, जलगांव ,दोंडाईचा ,सेलूर, सेवली नसीराबाद आदि क्षेत्रों से भाई- बहनों ने मर्यादामहोत्सव की शोभा बढ़ाई। आभार ज्ञापन उत्साही कार्यकर्ता चेतन मरलेचा ने किया ।सम्मान में जालना के वरिष्ठ सबको में श्रावक ने पचरंगा दुपट्टा व साहित्य समर्पित किया ।जिसे परेश धोका ने संचालित किया।
मर्यादा महोत्सव के इस कार्यक्रम का संचालन साध्वी श्री योगक्षेमप्रभाजी ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया। इस मौके पर पूज्यप्रवर के पावन सानिध्य में जालना से समायोज्य त्रिदिवसीय कार्यक्रम के बैनर का लोकार्पण स्थानीय श्रावक समाज द्वारा किया गया। यह जानकारी अजित सेठिया ने दी।
जालना मराठवाड़ा की धरती पर मर्यादा महोत्सव का शानदार आगाज

