मुंबई । साध्वी सोमलता एवं साध्वीवृन्द का डोंबिवली में जप तप स्वाध्याय की एतिहासिक त्रिवेणी बही थी । इस चातुर्मास में अनेक उपलब्धि की वजह से डोम्बिवली के अनेक श्रावको ने रास्ते की सेवा कर साध्वीश्री को जयसिंग़पुर तक प्रवासित करने में अहम भूमिका का निर्वाहन किया । चातुर्मास सम्पन्न कर गुरुआज्ञा से गुरुदर्शन के लिए साध्वीश्री का विहार जयसिंग़पुर तक पूर्ण हुआ ।
सम्पूर्ण श्रावक समाज डोंबिवली के सहयोग एवं विहार संयोजक प्रकाश कच्छारा , कांतिलाल कोठारी, दिनेश कच्छारा , जगदीश परमार के संयोजना में जयसिंगपुर तक रास्ते की सेवा संपन्न हुई। जयसिंग़पुर में स्वागत कार्यक्रम में साध्वी सोमलता ने डोंबिवली चातुर्मास को एतिहासिक चातुर्मास बताते हुए कहा की डोंबिवली श्रावक समाज ने रास्ते की सेवा में भी बढ़चढ़ के हिस्सा लिया । उनका यह समर्पण भाव गुरु इंगित को दर्शाता है । पैदल चलने में काफी दिक्कतें आती होगी परन्तु किसी श्रावक ने एक शब्द तक हमे नही बोला । ऐसे श्रावको की आज सही मायने में धर्म संघ को जरूरत है । जयसिंग़पुर पहुंचते ही साध्वीश्री के दर्शनार्थ काफी श्रावको में डोम्बिवली सभा अध्यक्ष सुरेश सिंघवी, जयसिंगपुर अध्यक्ष अशोक रुणवाल आदि ने दर्शनलाभ लिया ।
डोम्बिवली चातुर्मास पश्चात साध्वीश्री जयसिंगपुर में प्रवासित

