नई दिल्ली:अमरोहा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जेल में अच्छा चाल-चलन दोषी को फांसी की सजा पर अमल रोकने का आधार नहीं हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शबनम और उसके प्रेमी सलीम की फांसी की सजा के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान दोषियों के वकीलों ने बताया कि जेल में वह सुधर रहे हैं और इस बात का ध्यान रखा जाए कि शबनम मां भी बन चुकी है। घटना के समय वह गभर्वती थी। सलीम, शबनम के वकील ने कहा कि उसका बच्चा छोटा है, उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। वकील ने कहा कि उसका जेल में बर्ताव अच्छा है। वह जेल के स्कूल के बच्चों को पढ़ाती है, वह जेल के कई सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होती है।
ऐसा कोई फैसला दिखाइए : इस पर पीठ ने पूछा कि क्या दोषियों के अच्छे चाल-चलन पर पुरानी दंडसिद्धी में विचार किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि आप शीर्ष कोर्ट का कोई ऐसा फैसला दिखाइए जिसमें जेल के अच्छे आचरण के कारण फांसी की सज़ा को कम किया गया हो। पीठ ने कहा कि हमारे फैसले का सम्मान किया जाना चहिए, फांसी की सज़ा को स्वीकार किया जाना चाहिए, आज कल ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम समाज के लिए न्याय करते हैं। हम ऐसे अपराधी को केवल इसलिए माफ नही कर सकते क्योंकि उसका दूसरे अपराधियों के साथ व्यवहार अच्छा है।
हर अपराधी दिल में निर्दोष
शीर्ष अदालत ने कहा कि हर अपराधी दिल में निर्दोष होता है लेकिन हमें यह देखना है कि उसने अपराध भी किया है। पीठ ने कहा कि इन दोषियों ने न सिर्फ अपने माता, पिता, भाई, भाभी की हत्या कर दी थी बल्कि साथ में 10 माह के भतीजे को भी मौत के घाट उतार दिया था। हत्या योजना बनाकर की गई।
सलीम और शबनम के वकील ने उनकी गरीबी और अशिक्षा का हवाला देते हुए सजा में रहम की मांग की। पर कोर्ट ने कहा कि देश में बहुत से लोग गरीब और अशिक्षित हैं। आप पुनर्विचार याचिका पर बहस कर रहे हैं आप ये बताइए कि उच्चतम न्यायालय ने फांसी की सजा देने के अपने फैसले में कहां गलती की है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: अच्छा चाल चलन सजा रोकने का आधार नहीं

