नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को टेलीकॉम कंपनियों से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के विवाद से संबंधित 92000 करोड़ रुपए वसूलने की इजाजत दे दी। कंपनियों को जुर्माना और ब्याज भी चुकाना पड़ेगा। अदालत ने गुरुवार को फैसला देते हुए दूरसंचार विभाग द्वारा तय एजीआर की परिभाषा को बरकरार रखा। अदालत ने टेलीकॉम कंपनियों की अपील खारिज कर दी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब और मुकदमेबाजी नहीं होगी। बकाया भुगतान की गणना के लिए समय अवधि तय की जाएगी। कंपनियां टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि किराए, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और डिविडेंड जैसे नॉन टेलीकॉम रेवेन्यू भी एजीआर में गिने जाएंगे।
एजीआर विवाद क्या है?
नई टेलीकॉम नीति के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर का कुछ हिस्सा सालाना लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना जरूरी है। इसके अतिरिक्त रेडियो फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल के लिए स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज (एसयूसी) भी देना जरूरी है। कंपनियां अपने हिसाब से गणना के आधार पर स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस फीस चुकाती हैं। दूरसंचार विभाग लगातार बकाया की मांग करता रहा है। विभाग ने कहा था कि एजीआर में डिविडेंड, हैंडसेट की बिक्री, किराया और कबाड़ की बिक्री भी शामिल होनी चाहिए। टेलीकॉम कंपनियों की दलील थी कि एजीआर में सिर्फ प्रमुख सेवाएं शामिल की जाएं। इस मामले में अदालत ने अगस्त में फैसला सुरक्षित रखा था।
किस कंपनी पर कितनी लाइसेंस फीस बकाया?
| कंपनी | बकाया (रुपए) |
| भारती एयरटेल | 21,682.13 करोड़ |
| वोडाफोन | 19,823.71 करोड़ |
| रिलायंस कम्युनिकेशंस | 16,456.47 करोड़ |
| बीएसएनएल | 2,098.72 करोड़ |
| एमटीएनएल | 2,537.48 करोड़ |
दूरसंचार विभाग ने जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर टेलीकॉम कंपनियों पर बकाया लाइसेंस फीस की जानकारी दी थी। कुल 92,641.61 करोड़ रुपए का बकाया बताया गया था।
फैसले का असर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टेलीकॉम कंपनियों के शेयर 20% तक लुढ़क गए। वोडाफोन-आइडिया के शेयर में इतनी गिरावट आई। भारती एयरटेल का शेयर 6% नुकसान में आ गया। भारती एयरटेल पर सबसे ज्यादा 21,682 करोड़ रुपए बकाया हैं।

