विश्व शांति के लिए सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता जरूरी- मुनिश्री जिनेश कुमारजी
पालघर। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत अहिंसा दिवस पर सर्वधर्म सद्भावना सम्मेलन अणुव्रत समिति द्वारा बुधवार 2 अक्टूबर को साय 8:30 बजे तेरापंथ भवन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुस्लिम संप्रदाय से मौलाना खुर्शीद आलम निजारी, हिंदू नारदीय संप्रदाय से सदाशिव शंकर पाटील व ब्रम्हाकुमारी से हेमा दीदी विशेष रूप से उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा अहिंसा परमो धर्म है। धर्म अखंड ज्योति है। धर्म प्रकाश है। भारत वर्ष में विभिन्न धर्म संप्रदाय के लोग रहते हैं। उनमें सदभाव बना रहे यह आवश्यक है। आचार्य तुलसी ने सांप्रदायिक, सौहार्द एवं धार्मिक सहिष्णुता के लिए अणुव्रत के जरिये बहुत कार्य किया। संप्रदाय धर्म का सुरक्षा कवच हो सकता है पर धर्म से ऊपर नहीं हो सकता। किसी भी संप्रदाय में रहते हुए अनाग्रह, सापेक्षता, समन्वय व अनेकांत की विचारधारा से आप्लावित रहेंगे तो देश में सांप्रदायिक सदभाव एवं सौहार्द बना रहेगा। आचार्य तुलसी ने नारा दिया था इंसान पहले इंसान फिर फिर हिंदू या मुसलमान। अणुव्रत मानवीय एकता में व सम्प्रदायिक सौहार्द में विश्वास रखता है। इसलिए ही वह निर्विशेषन धर्म है।
अणुव्रत आचार संहिता को किसी भी धर्म को मानते हुए स्वीकार किया जा सकता है। मुनिश्री ने आगे कहा अहिंसा कल्याणकारी व हितकारी है। अहिँसा का विधायक रुप है मैत्री, करुणा सब जीवो को अपनी आत्मा के समान सम मानता है। आज अहिंसा दिवस पर निरपराधक जीवो की संकल्प पूर्वक हिंसा करने का त्याग करेंगे तो अहिंसा दिवस मनाना सार्थक हो सकेगा।
इस अवसर पर ब्रम्हा कुमारी से हेमा दीदी ने कहा प्रत्येक के प्रति सद्भावना रहेगी तभी हम सत्य, अहिंसा, एकता के रास्ते पर चल सकेंगे। सर्व धर्म एक हैं और एक रहेंगे। मौलाना खुर्शीद आलम निजामी ने कहा कि मोहब्बत ही एक ऐसी चीज है, जिसे सभी धर्म संप्रदाय के लोगों में सद्भावना कायम की जा सकती है। जैन मजहब इस दुनिया को मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देता है। सदाशिव शंकर पाटील ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। संप्रदाय अभिनिवेश नहीं होना चाहिए। सद्भावना के लिए सत्पुरूषों की सत्संगति की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण अणुव्रत समिति के अध्यक्ष देवीलाल जी ने किया। आभार ज्ञापन सभा के अध्यक्ष नरेश जी ने व संचालन अणुव्रत समिति के मंत्री विमल जी ने किया। अतिथियों को साहित्य भेंट कर सम्मान किया गया इस। अवसर पर विभिन्न संप्रदायों के श्रद्धालु उपस्थित थे। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।
अहिंसा दिवस पर सर्वधर्म सद्भावना सम्मेलन का आयोजन

