चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिक अब सब्जियों में पोषक तत्व बढ़ाएंगे। इसके लिए सब्जियों के जीन में बदलाव करने की तैयारी है, ताकि वैरायटी में सुधार हो सके। वैज्ञानिकों के मुताबिक मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से धीरे-धीरे सब्जियों की पोषकता भी कम हो रही है। उत्पादन लभगभ स्थिर हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से अब तक लगभग 57 सब्जी वाली फसलों की नई प्रजातियां विकसित की जा चुकी हैं। इन्हीं में से अधिक प्रयोग में आने वाली सब्जियों की पोषकता को बढ़ाना जरूरी है। पहले चरण में मटर, टमाटर, बैगन और पालक की फसल को चुना गया है।
आलू के बाद टमाटर का सर्वाधिक प्रयोग-
आमतौर पर सब्जियों में आलू के बाद टमाटर का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। सब्जी से लेकर, सलाद, सूप और चटनी बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि ब्यूटी प्रोडक्ट के रूप में भी प्रयोग होता है। इसी तरह मटर, पालक और बैगन भी पहली पसंद में शुमार किए जा रहे हैं। टमाटर में विटामिन सी, लाइकोपिन, विटामिन, पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इसमें कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले तत्व भी होते हैं। टमाटर की सबसे बड़ी खासियत होती है कि पकाने के बाद भी उसके पोषक तत्व बने रहते हैं।
मटर में भरपूर आयरन-
पोषक तत्वों से भरपूर मटर में आयरन, जिंक, मैगनीज और कॉपर मौजूद होता है जो शरीर को बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भी पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। मटर में कैल्शियम व जिंक होता है जो हड्डियों को मजबूती देता है। इन पोषक तत्वों की कमी पाई जा रही है।
पालक काफी फायदेमंद-
पालक में पाया जाने वाला कैल्शियम बढ़ते बच्चों, बुजुर्ग और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होता है। पालक में मौजूद फ्लेवोनोइड्स एंटीऑक्सीडेंट का काम करता हैं। यह तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने के अलावा हृदय संबंधी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार होता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन और विटामिन सी किसी भी तरह के नुकसान से बचाता है।
कोट-
संस्थान का पोषक फसलों पर जोर है। जीन टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके हम वैरायटी सुधार सकते हैं। वैसे पत्तियों पर बायोफर्टिलाइजर के छिड़काव और मिट्टी की सेहत सुधार कर पोषकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
– डॉ. राजीव, एसोसिएट प्रोफेसर, सीएसए सब्जी विज्ञान
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